Wednesday, September 30, 2020

महाकवि माघ अपनी उदारता के लिए प्रसिद्ध थे.....

उदारता 

महाकवि माघ अपनी उदारता के लिए प्रसिद्ध थे.....
महाकवि माघ अपनी उदारता के लिए प्रसिद्ध थे.....


 महाकवि माघ अपनी उदारता के लिए प्रसिद्ध थे, उन दिनों उनकी स्थिति खराब चल रही थी फिर भी हृदय की उदारता पहले जैसी ही थी। 

एक रात उनके घर पर एक याचक आया उसने बताया कि मुझे अपनी कन्या का विवाह करना है, और मेरे पास कुछ भी नहीं है। आप की ख्याति सुनकर आपके पास आया हूं कुछ सहायता मिल जाए तो मेरा काम बन जाए।

कवि माघ का हृदय भर आया, घर की सम्पत्ति पर दृष्टि डाली उनके पास कुछ भी नहीं था। तभी पास ही सो रही पत्नी पर दृष्टि गई, धीरे से कंगन उतारा और अतिथि को देते हुए बोले इस समय इससे अधिक के लिए मैं विवश हूं। जो कुछ पास में है, उसे स्वीकार कीजिए।

तभी उनकी पत्नी की आंखे खुली वस्तु स्थिति को समझा, मंद मुस्कुराहट के साथ बोली भला विवाह जैसा कार्य एक कंगन में कैसे हो सकेगा? यह दूसरा भी ले जाइए और दूसरा कंगन भी उतारकर दे दिया। माघ पत्नी के इस कृत्य पर पुलकित हो उठे।

Labels:

प्रोफेसर -छात्र से - क्या तुम बता सकते हो....

 

प्रोफेसर -छात्र से - क्या तुम बता सकते हो
Professor Jokes in Hindi

प्रोफेसर -छात्र से - क्या तुम बता सकते हो, कि छात्रों द्वारा अक्सर किन शब्दों को प्रयोग किया जाता है?

छात्र - जी मालूम नहीं।

प्रोफेसर - बिल्कुल सही।


Labels:

एक औरत अपने पति को लेकर एक डाक्टर के पास जाती है.....

 

एक औरत अपने पति को लेकर एक डाक्टर के पास जाती है
एक औरत अपने पति को लेकर एक डाक्टर के पास जाती है

एक औरत अपने पति को लेकर एक डाक्टर के पास जाती है , और डाक्टर से कहती है डाक्टर साहब मेरे पति कभी-कभी घोड़े जैसी हरकतें करते है कभी दौड़ने लगते है और हिनहिनाते हैं।

डाक्टर - आपके पति ठीक तो हो जायेंगे लेकिन इलाज में पचास हजार रुपये लगेंगे।

औरत- पैसे की आप बिल्कुल भी चिंता न करिए। अभी पिछले हफ्ते ही उन्होंने रेस में एक लाख रुपये जीते हैं।

Labels:

एक टी0वी0 विक्रेता ने अपनी बेटी का वैवाहिक विज्ञापन.....

 

एक टी0वी0 विक्रेता ने अपनी बेटी का वैवाहिक विज्ञापन
Hindi Jokes

एक टी0वी0 विक्रेता ने अपनी बेटी का वैवाहिक विज्ञापन कुछ इस प्रकार निकलवाया - शानदार आवाज फुल साइज अच्छी कंडीशन में देखने में सुन्दर सालों साल चलने की गारन्टी पड़ोसियों की जलन आपकी शान।

Labels:

बेटे थोड़ा रुक जाओ अभी तुम्हारे पिता आयेंगे .....

 

बेटे थोड़ा रुक जाओ अभी तुम्हारे पिता आयेंगे
बेटे थोड़ा रुक जाओ अभी तुम्हारे पिता आयेंगे 

माता : पुत्र से - बेटे थोड़ा रुक जाओ अभी तुम्हारे पिता आयेंगे और हम सभी साथ खाना खायेंगे।

पुत्र- माताजी आज पिता जी नहीं खायेंगे क्योकि उन्होंने मुझसे कहा था कि हम पहले डाकखाने फिर माल खाने उसके बाद कारखाने जायेंगे।

Labels:

भूगोल का गृह कार्य करते हुए एक बच्चे ने....

 

भूगोल का गृह कार्य करते हुए एक बच्चे ने....
भूगोल का गृह कार्य करते हुए एक बच्चे ने....

भूगोल का गृह कार्य करते हुए एक बच्चे ने अपने पिता से पूछा - पिताजी हिमालय कहां है!

पिता - अपनी मां से पूछो वही इधर उधर चीजें रखकर भूल जाती है।

Labels:

मैं मशहूर होना चाहता हूं मैं हफ्ते भर दिखाई न दूं ....

 

मैं मशहूर होना चाहता हूं मैं हफ्ते भर दिखाई न दूं
मैं मशहूर होना चाहता हूं मैं हफ्ते भर दिखाई न दूं 

मैं मशहूर होना चाहता हूं मैं हफ्ते भर दिखाई न दूं तो लोग एक दूसरे से पूछने लगें कि रजत कहां चला गया इसके लिए मुझे क्या करना चाहिए!

एक दोस्त - कुछ खास नहीं हर किसी से पैसे उधार लो और चंपत हो जाओ।

Labels:

अध्यापक - तुम्हें शर्म आनी चाहिए कि गणित में पांच अंक मिले हैं?

अध्यापक - तुम्हें शर्म आनी चाहिए कि गणित में पांच अंक मिले हैं?
अध्यापक - तुम्हें शर्म आनी चाहिए कि गणित में पांच अंक मिले हैं?


अध्यापक - तुम्हें शर्म आनी चाहिए कि गणित में पांच अंक मिले हैं?

राजेश - सर आपने ही तो कहा था कि जीरो को कोई महत्व नहीं होता।

Labels:

कक्षा में एक होटल मालिक के लड़के ने उत्तर दिया....Hindi Jokes

कक्षा में एक होटल मालिक के लड़के ने उत्तर दिया
कक्षा में एक होटल मालिक के लड़के ने उत्तर दिया...


 मास्टर जी ने कक्षा में पूछा- यदि 50 बारातियों को खाना खिलाने के लिए पांच किलो दाल चाहिए तो बताओ 75 बारातियों को खाना खिलाने के लिए कितनी दाल की आवश्यकता होगी?

कक्षा में एक होटल मालिक के लड़के ने उत्तर दिया - मास्टर जी दाल तो उतनी ही लगेगी, केवल पानी, मिर्च व नमक की मात्रा बढ़ानी पड़ेगी।


Labels:

हर बीते हुए दिनों की याद है दोस्ती, मुसीबत में मदद की फरियाद है दोस्ती।

 ये है दोस्ती

हर बीते हुए दिनों की याद है दोस्ती, मुसीबत में मदद की फरियाद है दोस्ती।
हर बीते हुए दिनों की याद है दोस्ती, मुसीबत में मदद की फरियाद है दोस्ती।


हर बीते हुए दिनों की याद है दोस्ती, मुसीबत में मदद की फरियाद है दोस्ती।

टूटे हुए दिलों को भी जोड़ दे जो, दुश्मनी की जंग में आबाद है दोस्ती।


भरोसे का दूसरा नाम है दोस्ती, कुदरत से हासिल एक ईनाम है दोस्ती।

कुछ ऐसे भी लोग हैं यहां जिनकी वजह से आज, बदनाम है दोस्ती।


कांटों की झाड़ में, गुलाब है दोस्ती, तपते रेगिस्तान में भी आज है दोस्ती।

दुनिया में एक खुली हुई किताब की तरह हर उलझे हुए प्रश्न का जवाब है दोस्ती।

Labels:

यदि मारना चाहते हो तो, ज्ञान व धर्म के शत्रु को मारो। | Satya Vachan

  सत्य वचन

यदि मारना चाहते हो तो, ज्ञान व धर्म के शत्रु को मारो। | Satya Vachan
यदि मारना चाहते हो तो, ज्ञान व धर्म के शत्रु को मारो। | Satya Vachan



यदि मारना चाहते हो तो, ज्ञान व धर्म के शत्रु को मारो।

राकेना चाहते हो तो , अधर्म को रोको।


छोड़ना चाहते हो तो, अपने अहंकार को छोड़ो।

देना चाहते हो तो, गरीबों को दान दो।


बोलना चाहते हो तो, मीठे वचन बोलो।

जलाना चाहते हो तो, ज्ञान के दीप को जलाओ।


आचरण के बिना ज्ञान व्यर्थ है।

विनम्रता ही सच्ची महानता है।

Labels:

Tuesday, September 29, 2020

विश्व बैंक और भारत - मुख्यालय ,अध्यक्ष, संगठनात्मक ढांचा (World Bank)

 विश्व बैंक (WORLDBANK) 

 स्थापना - वर्ष 1944 में (ब्रेटनवुड्स सम्मेलन के तहत अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंककी स्थापना)

 मुख्यालय - वॉशिंगटन, डी॰ सी. , संयुक्त राज्य अमेरिका

 सदस्य - 189 देश

 अध्यक्ष - डेविड माल्पास

 

विश्व बैंक  और भारत - मुख्यालय ,अध्यक्ष, संगठनात्मक ढांचा (World Bank)
विश्व बैंक  और भारत - मुख्यालय ,अध्यक्ष, संगठनात्मक ढांचा (World Bank)


विश्व बैंक एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है जो विश्व बैंक संयुक्त राष्ट्र संघ की विशिष्ट संस्था है|

 विश्व बैंक को अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक नाम से भी जाना जाता है।

  मुख्य उद्देश्य - सदस्य राष्ट्रों को पुनर्निमाण और विकास के कार्यों में आर्थिक सहायता देना एवं विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एक व्यापक विश्व अर्थव्यवस्था में शामिल करना और विकासशील देशों में ग़रीबी उन्मूलन के प्रयास करना है।


विश्‍व बैंक का संगठनात्मक ढांचा

 

 1. बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स - सदस्य देशों का एक गवर्नर एवं वैकल्पिक प्रतिनिधि, गवर्नर्स बोर्ड की बैठक वार्षिक रूप से होती है जिसमें इन सभी संस्थाओं के कामकाज की समीक्षा की जाती है।

 2.कार्यकारी निदेशक - गवर्नर्स बोर्ड की अधिकांश शक्तियों को धारण करते है|

 3.अध्यक्ष अध्यक्ष, कार्यकारी निदेशकों का प्रधान होता है| इसे 5 वर्षीय कार्यकाल हेतु चुना जाता है।


विश्व बैंक समूह के अंग

 

1.अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक 

(International Bank for Reconstruction and Development-IBRD)

 2. अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (International Finance Corporation-IFC)

 3. अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (International Development Association-IDA)

 4. निवेश विवादों के निपटारे के लिये अंतर्राष्ट्रीय केंद्र 

(International Centre for Settlement of Investment Disputes-ICSID)

 5. बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (Multilateral Investment Guarantee Agency-MIGA)

  

विश्व बैंक के उद्देश्य -

1.  गरीबी घटाने तथा उत्पादक क्षमता को बढ़ाने के लिए आर्थिक पुनर्निर्माण और विकास के लिए सदस्य देशों को दीर्घकालीन पूंजी प्रदान करना।

2. भागीदारी देशों के माध्यम से निजी निवेश ऋणों को प्रोत्साहित किया जाना।

3. विशिष्ट निवेश परियोजनाओं एवं समग्र विकास योजनाओं के क्षेत्र में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना।


ऋण वितरण


अब तक वितरित अपने कुल ऋण का 75 प्रतिशत भाग अफ्रीका, एशिया और लेटिन अमेरिका के विकासशील राष्ट्रों को प्रदान किया गया है, जबकि यूरोप के विकसित राष्ट्रों को कुल ऋण का 25 प्रतिशत ही दिया गया है।


विश्व बैंक और भारत


भारत में परिवहन एवं संचार, सिंचाई, शिक्षा, जलापूर्ति, विद्युत शक्ति, जनसंख्या नियंत्रण, गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढ़ांचा , ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण आदि दीर्घकालीन परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए बैंक द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी गई है।

 


Labels:

Download UP ITI 1st Round Seat Allotment Result 2020 Online

This post related with ITI 1st Round Seat Allotment Result 2020 . If you apply for ITI 2020 then you are at right place. From 29 September 2020 you can download 1st Round ITI Allotment Result.


Steps How to Download ITI Seat Allotment Result



Step1- Candidates visit the official website of UPITI - www.scvtup.in

Download UP ITI 1st Round Seat Allotment Result 2020 Online
Download UP ITI 1st Round Seat Allotment Result 2020 Online


Step2- Click on News Ticker moving on Official site of 1st Round Seat Allotment Result (Link Below)


Step4-Fill Registration No. and Date of Birth of Candidate. (See Below Image)

Download UP ITI 1st Round Seat Allotment Result 2020 Online
Download UP ITI 1st Round Seat Allotment Result 2020 Online



Step5- Finally Download Your Allotment Result.


Labels:

Monday, September 28, 2020

इससे अच्छी पोस्ट मैंने अपनी ज़िंदगी में आज तक नही पढ़ी, आप भी जरूर पढियेगा !

 "बेटा! थोड़ा खाना खाकर जा ..!! दो दिन से तुने कुछ खाया नहीं है।" लाचार माता के शब्द है अपने बेटे को समझाने के लिये।

 

इससे अच्छी पोस्ट मैंने अपनी ज़िंदगी में आज तक नही पढ़ी, आप भी जरूर पढियेगा !
इससे अच्छी पोस्ट मैंने अपनी ज़िंदगी में आज तक नही पढ़ी, आप भी जरूर पढियेगा !

"देख मम्मी ! मैंने मेरी बारहवीं बोर्ड की परीक्षा के बाद वेकेशन में सेकेंड हैंड बाइक मांगी थी, और पापा ने प्रोमिस किया था। आज मेरे आखरी पेपर के बाद दीदी को कह देना कि जैसे ही मैं परीक्षा खंड से बाहर आऊंगा तब पैसा लेकर बाहर खडी रहे। मेरे दोस्त की पुरानी बाइक आज ही मुझे लेनी है। और हाँ, यदि दीदी वहाँ पैसे लेकर नहीं आयी तो मैं घर वापस नहीं आऊंगा।"

 

एक गरीब घर में बेटे मोहन की जिद्द और माता की लाचारी आमने सामने टकरा रही थी।

 

"बेटा! तेरे पापा तुझे बाइक लेकर देने ही वाले थे, लेकिन पिछले महीने हुए एक्सिडेंट ..

 

मम्मी कुछ बोले उसके पहले मोहन बोला "मैं कुछ नहीं जानता .. मुझे तो बाइक चाहिये ही चाहिये ..!!" ऐसा बोलकर मोहन अपनी मम्मी को गरीबी एवं लाचारी की मझधार में छोड़ कर घर से बाहर निकल गया।12वीं बोर्ड की परीक्षा के बाद भागवत 'सर एक अनोखी परीक्षा का आयोजन करते थे।

हालांकि भागवत सर का विषय गणित था, किन्तु विद्यार्थियों को जीवन का भी गणित भी समझाते थे और उनके सभी विद्यार्थी विविधतासभर ये परीक्षा अचूक देने जाते थे।

 

इस साल परीक्षा का विषय था मेरी पारिवारिक भूमिका मोहन परीक्षा खंड में आकर बैठ गया। उसने मन में गांठ बांध ली थी कि यदि मुझे बाइक लेकर देंगे तो मैं घर जाऊंगा। भागवत सर के क्लास में सभी को पेपर वितरित हो गया। पेपर में 10 प्रश्न थे। उत्तर देने के लिये एक घंटे का समय दिया गया था। मोहन ने पहला प्रश्न पढा और जवाब लिखने की शुरुआत की।

 

प्रश्न नंबर १ :-  आपके घर में आपके पिताजी, माताजी, बहन, भाई और आप कितने घंटे काम करते हो? सविस्तर बताइये?

 

मोहन ने जवाब लिखना शुरू कर दिया।

 

जवाबः पापा सुबह छह बजे टिफिन के साथ अपनी ओटोरिक्षा लेकर निकल जाते हैं। और रात को नौ बजे वापस आते हैं। कभी कभार वर्धी में जाना पड़ता है। ऐसे में लगभग पंद्रह घंटे।

 

मम्मी सुबह चार बजे उठकर पापा का टिफिन तैयार कर, बाद में घर का सारा काम करती हैं। दोपहर को सिलाई का काम करती है। और सभी लोगों के सो जाने के बाद वह सोती हैं। लगभग रोज के सोलह घंटे।

 

दीदी सुबह कालेज जाती हैं, शाम को 4 से 8 पार्ट टाइम जोब करती हैं। और रात्रि को मम्मी को काम में मदद करती हैं। लगभग बारह से तेरह घंटे। मैं, सुबह छह बजे उठता हूँ, और दोपहर स्कूल से आकर खाना खाकर सो जाता हूँ। शाम को अपने दोस्तों के साथ टहलता हूँ। रात्रि को ग्यारह बजे तक पढता हूँ। लगभग दस घंटे। (इससे मोहन को मन ही मन लगा, कि उनका कामकाज में औसत सबसे कम है।)

 

पहले सवाल के जवाब के बाद मोहन ने दूसरा प्रश्न पढा ..

 

प्रश्न नंबर २ :-  आपके घर की मासिक कुल आमदनी कितनी है?

 

जवाबः पापा की आमदनी लगभग दस हजार हैं। मम्मी एवं दीदी मिलकर पांच हजार जोडते हैं। कुल आमदनी पंद्रह हजार।

 

प्रश्न नंबर ३ :-  मोबाइल रिचार्ज प्लान, आपकी मनपसंद टीवी पर आ रही तीन सीरियल के नाम, शहर के एक सिनेमा होल का पता और अभी वहां चल रही मूवी का नाम बताइये?

 

सभी प्रश्नों के जवाब आसान होने से फटाफट दो मिनट में लिख दिये ..

 

प्रश्न नंबर ४ :-  एक किलो आलू और भिन्डी के अभी हाल की कीमत क्या है? एक किलो गेहूं, चावल और तेल की कीमत बताइये? और जहाँ पर घर का गेहूं पिसाने जाते हो उस आटा चक्की का पता  दीजिये।

 

मोहनभाई को इस सवाल का जवाब नहीं आया। उसे समझ में आया कि हमारी दैनिक आवश्यक जरुरतों की चीजों के बारे में तो उसे लेशमात्र भी ज्ञान नहीं है। मम्मी जब भी कोई काम बताती थी तो मना कर देता था। आज उसे ज्ञान हुआ कि अनावश्यक चीजें मोबाइल रिचार्ज, मुवी का ज्ञान इतना उपयोगी नहीं है। अपने घर के काम की जवाबदेही लेने से या तो हाथ बटोर कर साथ देने से हम कतराते रहे हैं।

 

प्रश्न नंबर ५ :- आप अपने घर में भोजन को लेकर कभी तकरार या गुस्सा करते हो?

 

जवाबः हां, मुझे आलू के सिवा कोई भी सब्जी पसंद नहीं है। यदि मम्मी और कोई सब्जी बनायें तो, मेरे घर में झगड़ा होता है। कभी मैं बगैर खाना खायें उठ खडा हो जाता हूँ।

(इतना लिखते ही मोहन को याद आया कि आलू की सब्जी से मम्मी को गैस की तकलीफ होती हैं। पेट में दर्द होता है, अपनी सब्जी में एक बडी चम्मच वो अजवाइन डालकर खाती हैं। एक दिन मैंने गलती से मम्मी की सब्जी खा ली, और फिर मैंने थूक दिया था। और फिर पूछा कि मम्मी तुम ऐसा क्यों खाती हो? तब दीदी ने बताया था कि हमारे घर की स्थिति ऐसी अच्छी नहीं है कि हम दो सब्जी बनाकर खायें। तुम्हारी जिद के कारण मम्मी बेचारी क्या करें?) मोहन ने अपनी यादों से बाहर आकर

अगले प्रश्न को पढा

 

प्रश्न नंबर ६ :- आपने अपने घर में की हुई आखरी जिद के बारे में लिखिये ..

 

मोहन ने जवाब लिखना शुरू किया। मेरी बोर्ड की परीक्षा पूर्ण होने के बाद दूसरे ही दिन बाइक के लिये जीद्द की थी। पापा ने कोई जवाब नहीं दिया था, मम्मी ने समझाया कि घर में पैसे नहीं है। लेकिन मैं नहीं माना! मैंने दो दिन से घर में खाना खाना भी छोड़ दिया है। जबतक बाइक नहीं लेकर दोगे मैं खाना नहीं खाऊंगा। और आज तो मैं वापस घर नहीं जाऊंगा कहके निकला हूँ।

अपनी जिद का प्रामाणिकता से मोहन ने जवाब लिखा।

 

प्रश्न नंबर ७ :- आपको अपने घर से मिल रही पोकेट मनी का आप क्या करते हो? आपके भाई-बहन कैसे खर्च करते हैं?

 

जवाब: हर महीने पापा मुझे सौ रुपये देते हैं। उसमें से मैं, मनपसंद पर्फ्यूम, गोगल्स लेता हूं, या अपने दोस्तों की छोटीमोटी पार्टियों में खर्च करता हूँ। मेरी दीदी को भी पापा सौ रुपये देते हैं। वो खुद कमाती हैं और पगार के पैसे से मम्मी को आर्थिक मदद करती हैं। हांउसको दिये गये पोकेटमनी को वो गल्ले में डालकर बचत करती हैं। उसे कोई मौजशौख नहीं है, क्योंकि वो कंजूस भी हैं।

 

प्रश्न नंबर ८ :- आप अपनी खुद की पारिवारिक भूमिका को समझते हो?

 

प्रश्न अटपटा और जटिल होने के बाद भी मोहन ने जवाब लिखा। परिवार के साथ जुड़े रहना, एकदूसरे के प्रति समझदारी से व्यवहार करना एवं मददरूप होना चाहिये और ऐसे अपनी जवाबदेही निभानी चाहिये। यह लिखते लिखते ही अंतरात्मासे आवाज आयी कि अरे मोहन! तुम खुद अपनी पारिवारिक भूमिका को योग्य रूप से निभा रहे हो? और अंतरात्मा से जवाब आया कि ना बिल्कुल नहीं ..!!

 

प्रश्न नंबर ९ :- आपके परिणाम से आपके माता-पिता खुश हैं? क्या वह अच्छे परिणाम के लिये आपसे जिद करते हैं? आपको डांटते रहते हैं?

 

(इस प्रश्न का जवाब लिखने से पहले हुए मोहन की आंखें भर आयी। अब वह परिवार के प्रति अपनी भूमिका बराबर समझ चुका था।) लिखने की शुरुआत की ..

 

वैसे तो मैं कभी भी मेरे माता-पिता को आजतक संतोषजनक परिणाम नहीं दे पाया हूँ। लेकिन इसके लिये उन्होंने कभी भी जिद नहीं की है। मैंने बहुत बार अच्छे रिजल्ट के प्रोमिस तोडे हैं। फिर भी हल्की सी डांट के बाद वही प्रेम और वात्सल्य बना रहता था।

 

प्रश्न नंबर १० :- पारिवारिक जीवन में असरकारक भूमिका निभाने के लिये इस वेकेशन में आप कैसे परिवार को मददरूप होंगें?

 

जवाब में मोहन की कलम चले इससे पहले उनकी आंखों से आंसू बहने लगे, और जवाब लिखने से पहले ही कलम रुक गई .. बेंच के निचे मुंह रखकर रोने लगा। फिर से कलम उठायी तब भी वो कुछ भी न लिख पाया। अनुत्तर दसवां प्रश्न छोड़कर पेपर सबमिट कर दिया। स्कूल के दरवाजे पर दीदी को देखकर उसकी ओर दौड़ पडा। "भैया! ये ले आठ हजार रुपये, मम्मी ने कहा है कि बाइक लेकर ही घर आना।" दीदी ने मोहन के सामने पैसे धर दिये।

 "कहाँ से लायी ये पैसे?" मोहन ने पूछा।

 

दीदी ने बताया

"मैंने मेरी ओफिस से एक महीने की सेलेरी एडवांस मांग ली। मम्मी भी जहां काम करती हैं वहीं से उधार ले लिया, और मेरी पोकेटमनी की बचत से निकाल लिये। ऐसा करके तुम्हारी बाइक के पैसे की व्यवस्था हो गई हैं। मोहन की दृष्टि पैसे पर स्थिर हो गई।

 

दीदी फिर बोली " भाई, तुम मम्मी को बोलकर निकले थे कि पैसे नहीं दोगे तो, मैं घर पर नहीं आऊंगा! अब तुम्हें समझना चाहिये कि तुम्हारी भी घर के प्रति जिम्मेदारी है। मुझे भी बहुत से शौक हैं, लेकिन अपने शौख से अपने परिवार को मैं सबसे ज्यादा महत्व देती हूं। तुम हमारे परिवार के सबसे लाडले हो, पापा को पैर की तकलीफ हैं फिर भी तेरी बाइक के लिये पैसे कमाने और तुम्हें दिये प्रोमिस को पूरा करने अपने फ्रेक्चर वाले पैर होने के बावजूद काम किये जा रहे हैं। तेरी बाइक के लिये। यदि तुम समझ सको तो अच्छा है, कल रात को अपने प्रोमिस को पूरा नहीं कर सकने के कारण बहुत दुःखी थे। और इसके पीछे उनकी मजबूरी है। बाकी तुमने तो अनेकों बार अपने प्रोमिस तोडे ही है न

मेरे हाथ में पैसे थमाकर दीदी घर की ओर चल निकली।

 

उसी समय उनका दोस्त वहां अपनी बाइक लेकर आ गया, अच्छे से चमका कर ले आया था।

"ले .. मोहन आज से ये बाइक तुम्हारी, सब बारह हजार में मांग रहे हैं, मगर ये तुम्हारे लिये आठ हजार ।" मोहन बाइक की ओर टगर टगर देख रहा था। और थोड़ी देर के बाद बोला "दोस्त तुम अपनी बाइक उस बारह हजार वाले को ही दे देना! मेरे पास पैसे की व्यवस्था नहीं हो पायी हैं और होने की हाल संभावना भी नहीं है।" और वो सीधा भागवत सर की केबिन में जा पहूंचा।

 

"अरे मोहन! कैसा लिखा है पेपर में?

भागवत सर ने मोहन की ओर देख कर पूछा।

 

"सर ..!!, यह कोई पेपर नहीं था, ये तो मेरे जीवन के लिये दिशानिर्देश था। मैंने एक प्रश्न का जवाब छोड़ दिया है। किन्तु ये जवाब लिखकर नहीं अपने जीवन की जवाबदेही निभाकर दूंगा और भागवत सर को चरणस्पर्श कर अपने घर की ओर निकल पडा।

 

घर पहुंचते ही, मम्मी पापा दीदी सब उसकी राह देखकर खडे थे।

"बेटा! बाइक कहाँ हैं?" मम्मी ने पूछा। मोहन ने दीदी के हाथों में पैसे थमा दिये और कहा कि सोरी! मुझे बाइक नहीं चाहिये। और पापा मुझे ओटो की चाभी दो, आज से मैं पूरे वेकेशन तक ओटो चलाऊंगा और आप थोड़े दिन आराम करेंगे, और मम्मी आज मैं मेरी पहली कमाई शुरू होगी। इसलिये तुम अपनी पसंद की मैथी की भाजी और बैगन ले आना, रात को हम सब साथ मिलकर के खाना खायेंगे।

 

मोहन के स्वभाव में आये परिवर्तन को देखकर मम्मी उसको गले लगा लिया और कहा कि "बेटा! सुबह जो कहकर तुम गये थे वो बात मैंने तुम्हारे पापा को बतायी थी, और इसलिये वो दुःखी हो गये, काम छोड़ कर वापस घर आ गये। भले ही मुझे पेट में दर्द होता हो लेकिन आज तो मैं तेरी पसंद की ही सब्जी बनाऊंगी।" मोहन ने कहा

"नहीं मम्मी! अब मेरी समझ गया हूँ कि मेरे घरपरिवार में मेरी भूमिका क्या है? मैं रात को बैंगन मैथी की सब्जी ही खाऊंगा, परीक्षा में मैंने आखरी जवाब नहीं लिखा हैं, वह प्रेक्टिकल करके ही दिखाना है। और हाँ मम्मी हम गेहूं को पिसाने कहां जाते हैं, उस आटा चक्की का नाम और पता भी मुझे दे दो"और उसी समय भागवत सर ने घर में प्रवेश किया। और बोले "वाह! मोहन जो जवाब तुमनें लिखकर नहीं दिये वे प्रेक्टिकल जीवन जीकर कर दोगे

 

"सर! आप और यहाँ?" मोहन भागवत सर को देख कर आश्चर्य चकित हो गया।

 

"मुझे मिलकर तुम चले गये, उसके बाद मैंने तुम्हारा पेपर पढा इसलिये तुम्हारे घर की ओर निकल पडा। मैं बहुत देर से तुम्हारे अंदर आये परिवर्तन को सुन रहा था। मेरी अनोखी परीक्षा सफल रही

और इस परीक्षा में तुमने पहला नंबर पाया है।"

ऐसा बोलकर भागवत सर ने मोहन के सर पर हाथ रखा।

 

मोहन ने तुरंत ही भागवत सर के पैर छुएँ और ऑटो रिक्शा चलाने के लिये निकल पडा....

       मेरा सभी सम्माननीय अभिभावकों से आग्रह है कि आप इस पोस्ट को आप भी जरूर पढ़िएगा और अपने बच्चों को भी पढ़ने का अवसर दें !

Labels:

कुछ | मनोवैज्ञानिक तथ्य | क्या हैं जिन्हें लोग नहीं जानते हैं?

कुछ मनोवैज्ञानिक तथ्य

कुछ | मनोवैज्ञानिक तथ्य | क्या हैं जिन्हें लोग नहीं जानते हैं?
 कुछ | मनोवैज्ञानिक तथ्य | क्या हैं जिन्हें लोग नहीं जानते हैं?


1- मनोविज्ञान कहता है कि जो लोग स्वयं झूठ बोलते हैं, वे अक्सर दूसरों के झूठ को पकड़ने में माहिर होते हैं।


2- मनोविज्ञान कहता है कि आप जितनी ज्यादा बात किसी के बारे में करते हैं, उतनी ही अधिक उस व्यक्ति के साथ प्यार में पड़ने की संभावना होती है।


3- मनोविज्ञान कहता है कि जब आप अपने पास किसी चीज़ के होने की लगातार कल्पना करते हैं, तो इस बात की पूरी संभावना है कि अंततः आप उसे खरीद लेंगें।


4- मनोविज्ञान कहता है कि हमारे शरीर की कोशिकाएं हमारे मन की हर बात पर प्रतिक्रिया करती हैं। यही कारण है कि जब हम निगेटिव सोचते हैं तब हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर हो जाती है जिससे हम बीमार महसूस करते हैं।


5- मनोविज्ञान कहता है कि जब आप चुप रहते हैं तो अक्सर इसका मतलब यह है कि आप नहीं सोचते कि दूसरा व्यक्ति आपके विचारों को सुनने के लिए तैयार है।


6- मनोविज्ञान का कहना है कि अक्सर जब आपसे कोई कहता है कि उन्हें आपसे एक प्रश्न पूछना है, तो आपका मस्तिष्क हाल ही में हुई सभी बुरी बातों को याद करने लगता है।


7- मनोविज्ञान कहता है कि जब आप किसी पिछली घटना को याद रखने की कोशिश करते हैं, तो आप वास्तव में उस घटना की बजाए यह याद करने की कोशिश करते हैं कि आखिरी बार आपने इसे कब याद किया था।


8- मनोविज्ञान कहता है कि हममें से कुछ लोग वास्तव में बहुत खुश होने से डरते हैं क्योंकि हमें भय होता है कि कहीं कुछ दुखद घटित न हो जाए।


9- मनोविज्ञान कहता है कि आपका पसंदीदा गीत आपका पसंदीदा इसलिए है क्योंकि इसके साथ आपकी कोई भावनात्मक घटना जुड़ी हुई है।


10- मनोविज्ञान कहता है कि स्मार्ट लोग अक्सर खुद को कम करके आंकते हैं, जबकि अज्ञानी लोग सोचते हैं कि वे शानदार हैं।

Labels:

Saturday, September 26, 2020

RRB NTPC previous year question papers free download (PDF) with answers

 Hello friends, In this post we provide you RRB NTPC previous year question papers free download (PDF) with answers . All previous papers are in pdf format in Hindi . 

RRB NTPC previous year question papers free download (PDF) with answers
RRB NTPC previous year question papers free download (PDF) with answers


Jaisa ki aap log jaante hain ki RRB NTPC ka exam 2020 mein hona hai jiski preparation bhi aap log kar rahe honge uske liye previous year paper ek baar jaroor dekhna padta hai. Kyonki hame previous year papers ye clear ho jata hai ki paper kis level ka hota aur questions kis prakar ke aate hain. 


Check Form Status RRB NTPC  Notice No. 01/2019

Jaisa ki aap log jante honge ki is samay rrb ntpc ka form status aap 21sept-30sept 2020 ke beech check kar sakte hain ki aapka form accept hai ya nahi. 



Exam Date RRB NTPC 01/2019

Aap sab jaante honge ki rrb ntpc 1st CBT ke exams 15 December 2020 se start ho rahe hain.

Download Previous Year Papers RRB NTPC (pdf)


Labels:

Friday, September 25, 2020

अमन के दुश्मनों पे मुरौव्वत नहीं करते ! Hindi Ghazal

 

अमन के दुश्मनों  पे मुरौव्वत नहीं करते !

अमन के दुश्मनों  पे मुरौव्वत नहीं करते ,

देश के गद्दारों से मोहबत नहीं करते !


जमाना लाख दिखाय सब्ज़ बाग़ दौलत के ,

हम अपने ईमान की तिजारत नहीं करते !


जर्रे - जर्रे में समाया है उसी का नूर ,

कुदरत की किसी शै से नफरत नहीं करते !


रस्मो -रिवाज़  को नींद आ जाती है ज़रूर ,

गर साथ दहेज़ बेटी रुख़सत नहीं करते !


नामो -निशान  उनका बाकी न रहेगा ,

जो अपनी तहजीब की हिफाजत नहीं करते !


इल्म -हुनर  किस तरह हासिल करेंगे वो ,

जो अपने उस्ताद की इज्जत नहीं करते !


अपनी औलाद से उम्मीद न रखे हरगिज़ ,

जो अपने वालदैन की खिदमत नहीं करते !


हालात ने बंसी को बना डाला है बन्दूक ,

दुसमन हमें मिटाने की हिम्मत नहीं करते !


हर मुश्किल की तदबीर  है "ऐ  शहामत "

हम कभी बुज़दिलों की हिमायत नहीं करते !

Labels:

Wednesday, September 16, 2020

डायनासोर - हास्य कविता


मैंने कहा ‘बेटे‘

तुमने फिल्म में, टीवी पर

या कहीं और

जरुर ही देखा होगा डायनासोर

न देखा हो, तो बताओ, जाओ

वह बोला, तो बताओ, जाओ

वह बोला , ‘आदरणीय बाप- 

डायनासोर देखिये आप

हर उम्र का अपना एक टेस्ट होता है

आपको तो डायनासोर में है

पर मुझे तो डायना में इंटरेस्ट है।


Labels:

कविता- ईना मीना गरम महीना, टपटप चूने, लगा पसीना


ईना मीना गरम महीना,

टपटप चूने, लगा पसीना,

स्रसर फरफर, फरफर सरसर

धूल चढ़ी फिर, सबके सिर पर,

धाधा,धूंधूं, जलती है भू,

इतना गुस्सा, क्यों होती लू?

आटे पाटे, सूरज डांटे,

कड़ी धूप के, मारे चाटे।

Labels:

सुनती हो, सुनाती हो, कहकर आना जाना पापा का।

hindi ghazal

सुनती हो, सुनाती हो, कहकर आना जाना पापा का।

लगता है- बस मम्मी ही हैं, ठौर-ठिकाना पापा का।।

गुस्से से गरमाये चेहरा, जब भी मेरी मम्मी का।

कितना प्यारा सा लगता है, चुप रह जाना पापा का।।

मांग भरे रहती है मम्मी, फिर भी हर पल मांग करें।

दोनों हाथों लूट रही हैं, भरा खजाना पापा का।।

मेरे भगवन्, ऐसी घटना युगो-युगों दिन-रात घटे

मम्मी जी का पलक बिछाना लौट के आना पापा का।।

उनका दफ्तर से थककर आना, और चाय पीने के बाद।

अचरज जैसा लगता है हमको भी हंसना पापा का।।

Labels:

अब खिलौन से न, दिल बहलाइये। है हकीकत सामने भिड़ जाइये।

hindi ghazal


अब खिलौन से न, दिल बहलाइये। है हकीकत सामने भिड़ जाइये।

क्यूं किसी चेहरे पे, रौनक है नहीं। बात क्या है आप ही बतलाइये।।

टापकी सुनता यहां पे कौन है। चीखिये, चिल्लाइये, मर जाइये।।

थ्मल नहीं सकता है, हल इससे जनाब। आप सरकारे, बदलते जाइये।।

आइये मिल बैठकर बाते करें। बढ़ रहा है गम न अब कतराइये।।

आईने इस दौर के हरीश हम। इस तरह मत दूर, हमसे जाइये।।


Labels: