Saturday, October 31, 2020

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार | Types of Environmental Pollution

 पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार


1.वायु प्रदूषण

हमारे वायुमण्डल में विभिन्न प्रकार की गैसें जीवधारियों की अनेक क्रियाओं द्वारा एक विशेष अनुपात में उपस्थित रहती हैं। इन गैसों का असंख्य जीवधारियों और वायुमण्डल के बीच चक्रीकरण होता रहता है। जीवधारियों के द्वारा ही वायुमण्डल में आक्सीकरण और कार्बन डाइआक्साइड संतुलित मात्रा में रहती है। 

किन्तु वायुमण्डल और जीवधारियों के बीच स्थापित संतुलन उस समय संकट में पड़ जाता है, जब उद्योगों, वाहनों एवं घरेलू उपयोगों से निकला धुंआ, विभिन्न प्रकार के रसायनों से उत्पन्न विषैली गैसें, धूल के कण और रेडियोधर्मी पदार्थ वायु में प्रवेश करके इसे मानव स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, अपितु समस्त जीव-जगत के लिए हानिकारक बना देते हैं। यही वायु प्रदूषण कहलाता है।

2.जल प्रदूषण

इस धरती पर जीवन के लिए पहली शर्त है - जल के प्राकृतिक रुप में अस्तित्व। शुद्ध जल स्वादरहित, रंगरहित तथा गन्धरहित होना चाहिए। प्रकृति में जल का स्वयं शुद्धिकरण होता रहता है , परन्तु जब प्राकृतिक एवं मानवजनित स्त्रोतों से उत्पन्न प्रदूषकों का जल में इतना अधिक जमाव हो जाता है कि वह जल की सहन शक्ति या स्वयं शुद्धिकरण की क्षमता से अधिक हो जाता है, तो जल प्रदूषित हो जाता है। 

सी.ए. साउथविक के अनुसार - 

''मानवीय क्रियाकलापों से या किसी अन्य कारणों से जल के रासायनिक, भौतिक तथा जैविक गुणों में परिवर्तन को जल प्रदूषण कहते हैं। ''

जल प्रदूषण के निम्नलिखित कारण हैं-

  • कृषि में प्रयुक्त होने वाले रोगनाशक, कीटनाशक, खरपतवारनाशी, उवर्रक आदि से जल का प्रदूषण होता है।
  • नदियों, तालाबों व अन्य जलाशयों में नहाने, कपड़ा धोन के लिए प्रयुक्त डिटर्जेन्ट, लाशों के जलाने, मरे पशुओं को फेंकने से भी जल प्रदूषित होता है।
  • नगरों में सीवेज और भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा से जल में गन्दगी के साथ-साथ अनेक जीवाणु-विषाणु तथा अन्य रोग कारक सूक्ष्म जीव जल को दूषित कर देते हैं।
  • कारखानों से निकलने वाले गंदे अपशिष्ट जल, ठोस एवं घुले रासायनिक प्रदूषक तथा कई प्रकार के धात्विक पदार्थ नदियों, झीलों एवं तटीय सागर के जल को प्रदूषित करते हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों तथा शहरों की मलिन बस्तियों में शौचालयों के अभाव से भी जल प्रदूषण होता है।
  • मृदा अपरदन, भू-स्खलन, ज्वालामुखी उद्गार तथा पौधों एवं जन्तुओं के विघटन एवं वियोजन द्वारा भी जल - प्रदूषण होता है।

3.मृदा प्रदूषण

आज बढ़ती हुई आबादी के उदरपूर्ति के लिए भूमि के प्रति इकाई मात्रा से अधिक उपजल के लिए रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, रोगनाशक तथा अन्य रसायनों का अनियंत्रित प्रयोग किये जाने से हमारी सबसे बड़ी प्राकृतिक संपत्ति, मृदा अपनी गुणवत्ता खोती जा रही है। मृदा प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं - भू-क्षरण, सिंचाई के जल में हानिकारक लवण एवं रसायनों का मिला होना, औद्योगिक अपशिष्ट रासायनिक उर्वरक तथा अनेक तरह के जैवनाशक रसायन।


4.ध्वनि प्रदूषण

प्रदुषण के दूसरे घटकों में ध्वनि प्रदूषण का स्थान भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। शांत सुन्दर प्रकृति को हमने शोर-शराबे में डुबो दिया है। धरती पर ध्वनि प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। जब ध्वनि आवांछित रुप से बढ़ती जाती है, तब उसका अर्थ शोर-शराबे में बदल जाता है। ध्वनि की तीव्रता डेसीबल में आंकी जाती है।

साधारण बोलचाल की तीव्रता 60 डेसीबल तक होती है, तथा एक साधारण मानव ज्यादा से ज्यादा 130 डेसीबल तक की तीव्रता वाली ध्वनि सुन सकता है। जब ध्वनि की तीव्रता सुनने की इस सीमा को पार कर जाती है तो यह कष्टकारक हो जाती है। यहां तक कि ज्याद शोर-शराबे की वजह से लोगों के बहरे होने की संभावना अधिक हो जाती है। इसका सबसे बुरा असर बच्चों के ऊपर पड़ता है।

वैज्ञानिकों ने यह प्रयोग द्वारा ज्ञात किया है कि निरंतर शोर वाले स्थानों पर रहने वालों में आंशिक या पूर्ण बहरापन आ जाता है। 80 डेसीबल से अधिक तीव्रता वाले ध्वनि का श्रवण शक्ति पर विपरीत प्रभाव होने लगता है तथा 120 से अधिक डेसीबल वाला शोर इसे इतना अधिक विकृत कर देता है कि कानों की संवेदनहीनता हो जाती है।

ध्वनि तरंगे -

ध्वनि तरंगों के रुप में चलती हैं श्रव्य ध्वनि तरेंगे कहलाती हैं। ध्वनि तरंगों की आवृत्ति को हट्र्ज में मापा जाता है। श्रव्य ध्वनि तरंगों की न्यूनतम आवृत्ति 20 हट्र्ज और अधिकतम 20000 हट्र्ज होती है जिनको हम सुन सकते हैं। 

20 हट्र्ज से कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को हमारे कान नहीं सुन सकते इसे इन्फासोनिक तरंगें कहते हैं और जिस ध्वनि तरंग की आवृत्ति 20000 हट्र्ज से अधिक की होती है उसे अल्ट्रासोनिक ध्वनि तरंग कहते हैं इसे भी हम नहीं सुन पाते हैं। चमगादड़ उड़त समय अल्ट्रासोनिक ध्वनि तरंग उत्पन्न करता है।

5. रेडियोधर्मी प्रदूषण 

मानव के वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि परमाणु ऊर्जा का सृजनात्मक एवं परमाणु बम का विध्वंसक प्रयोग भी है। इस परमाणु ऊर्जा एवं परमाणु बम में प्रयोग किए जाने वाले यूरेनियम, प्लूटोनियम जैसे परमाणु ईंधन के नाभिकों के विखंडन से अपार ऊर्जा तथा अल्फा, बीटा, और गामा किरणों का उत्सर्जन होता है। इसी अल्फा, बीटा और गामा किरणों का उत्सर्जन करने वाले पदार्थों को रेडियोधर्मी पदार्थ तथा इससे उत्पन्न प्रदूषण को रेडियोधर्मी प्रदूषण कहते हैं। 

रेडियोधर्मी प्रदूषण सभी प्रदूषणों से अधिक हानिकारक और भयानक है , जिसका न केवल तात्कालिक प्रभाव पड़ता है, अपितु एक लम्बे समय तक वातावरण में बना रहता है। इस प्रकार से रेडियोधर्मिता से उत्पन्न हुआ प्रदूषण ही रेडियोधर्मी प्रदूषण या नाभिकीय प्रदूषण कहलाता है।

रेडियोधर्मिता के परमाणु के नाभिकों के विखंडन के अतिरिक्त अन्य स्त्रोत भी हैं जैसे ब्रहाण्ड किरणों द्वारा, एक्स-रे तथा अन्य वस्तुओं जो रेडियोधर्मी पदार्थों का उत्सर्जन करती हैं।


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पर्यावरण प्रदूषण से आशय | What is Pollution ?

 पर्यावरण प्रदूषण से आशय

    
पर्यावरण प्रदूषण से आशय

                                                                                                                            पर्यावरण प्रदूषण से आशय


पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ समझने से पूर्व यह आवश्यक है कि पहले पर्यावरण और प्रदूषण के अर्थों को अलग-अलग स्पष्ट किया जाए। पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ होता है, हमारे चारों ओर छाया या आवरण (परि + आवरण = पर्यावरण)। 

हमारे इस छाया या आवरण से तात्पर्य वायुमंडल, जलमंडल एवं जीवमंडल के बीच एक ऐसा प्राकृतिक संतुलन जिससे पृथ्वी पर जीवन (Life)  के लिए अनुकूलतम दशाएं उपलब्ध हो सकें। जबकि प्रदूषण का तात्पर्य किसी चीज के संदूषण या विकृत करने से है। 

अतः पर्यावरण प्रदूषण को हम इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं - ''जीवन विकास के लिए प्रकृति और जीव के बीच उपलब्ध संतुलन अवस्था में किसी अवांछित कारकों से चाहे अनचाहे परिवर्तन लाना ही पर्यावरण प्रदूषण है।''

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Friday, October 30, 2020

पर्यावरण संरक्षण से संबंधित मुख्य व्यक्ति | Environmental Studies

 पर्यावरण संरक्षण से संबंधित मुख्य व्यक्ति 

पर्यावरण संरक्षण से संबंधित मुख्य व्यक्ति

पर्यावरण संरक्षण से संबंधित मुख्य व्यक्ति 


  1. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण एवं विकास विश्व आयोग ने कुछ विशेष क्षेत्र के लिए प्रमुख विशेषज्ञों के सलाहकार मण्डलों का गठन किया था। अन्न सुरक्षा के सलाहकार मण्डल के अध्यक्ष - डाॅ0 एम0एस0 स्वामीनाथन (भारत)।
  2. विश्व प्रसिद्ध भारतीय पक्षी विज्ञानी का नाम बताइये जिसे 'भारत का पक्षी मानव' भी कहा जाता है- डाॅ0 सलीम अली।
  3. रीओ-डी-जैनरो (ब्राजील) में 1992 में आयोजित ‘पृथ्वी शिखर सम्मेलन‘ में भारतीय दल का नेतृत्व किसने किया था - कमलनाथ।
  4. 'मनुष्य जीवाश्म ईंधन को जलाकर पृथ्वी के जलवायु को बदल सकते हैं।' विश्व में यह चेतावनी किसने दी थी - जी.एस. केलेण्डर।
  5. 'वायु मण्डल की गैसें  प्रकाश किरणों को समाहित कर गर्मी उत्पन्न करती हैं।' यह तथ्य किसने बताया था - जोसेफ फोरियर।
  6. उस भारतीय वैज्ञानिक का नाम बताइये, जिसे अन्तर्राष्ट्रीय आणविक ऊर्जा अभिकरण के निदेशक मण्डल का अध्यक्ष चुना गया था - डाॅ0 आर. चिदम्बरम्।
  7. उत्तराखण्ड (भारत) की पहाड़ियों के ‘चिपको आंदोलन‘ के पीछे, जिसने विकास के लिए जंगल और वृक्षों के संरक्षण के महत्व के प्रति देशभर में जागृति फैलाई, कौन था - बाबा आमटे।
  8. उत्तराखण्ड (भारत) के गढ़वाल क्षेत्र में 'विष्णु प्रयाग पनबिजली योजना' के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था - चण्डी प्रसाद भट्ट।
  9. हिमालय क्षेत्र के लोगों में जीवित रहने के लिए मनोबल बढ़ाने को मई , 1981 से फरवरी, 1983 तक में 4870 किमी0 की लंबी पद यात्रा किसने की थी - सुंदरलाल बहुगुणा।
  10. राजस्थान के उस बहुव्यक्तित्व वाले पत्रकार को बताइये जो बीकानेर के भीनासर क्षेत्र से खेजड़ी वृक्षों को बचाने के लिए समाज और सरकार के विरुद्ध अपनी आवाज उठा रहा है - शुभू पटवा।
  11. उस पर्यावरणविद् का नाम बताइये, जिसने तरुण भारत संघ के नाम पर भारत के उच्चतम न्यायालय से अलवर (राजस्थान ) के सरिस्का वन क्षेत्र में खनन कार्य रुकवाने का महान कार्य किया - राजेन्द्र सिंह।
  12. भारत में पर्यावरणीय न्यायालय स्थापित करने की आवश्यकता का सुझाव सर्वप्रथम किसने दिया था - जस्टिस पी.एन. भगवती, राजस्थान।
  13. भारत के उच्चतम न्यायालय के उस न्यायाधीश का नाम बताइये, जिसने सबसे पहले ‘जनहितवाद‘ के तहत एक पर्यावरणीय विकृति के केस ‘म्यूनिसिपल कौंसिल रतलाम विरुद्ध श्री विरधीचन्द‘ में वादी के पक्ष में निर्णय दिया था - जस्टिस कृष्णा अय्यर।
  14. भारत में केन्द्र तथा राज्य दोनों स्तर पर स्वतन्त्र रुप से पर्यावरण विभाग स्थापित करने की अभिशंसा करने वाली समिति के अध्यक्ष का नाम बताइये - एन. डी. तिवारी।
  15. किस भारतीय वैज्ञानिक ने जैविक विविधता संरक्षण के लिए प्रशंसनीय कार्य हेतु राष्ट्रसंघ पर्यावरण कार्यक्रम का ‘संस्कावा पर्यावरण पुरस्कार‘ प्राप्त किया है - डाॅ0 एम0एस0 स्वामीनाथन।
  16. उस प्रोड्यूसर का नाम बताइये, जिसने टाटा ऊर्जा शोध संस्थान की सहायता से ‘ग्लोबल वार्मिंग‘ फिल्म बनाई -  सागरी छाबड़ा।
  17. दक्षिण भारत में प्रसिद्ध ‘अपीको आंदोलन‘ किसने प्रारंभ किया और प्रचारित भी किया था - पाण्डुरंग हेगड़े।
  18. किस प्रधानमंत्रित्वकाल में भारत में ‘बाघ परियोजना स्कीम‘ शुरु हुई थी - स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी।
  19. भारत में ‘प्रोजेक्ट टाइगर‘ की स्थापना का श्रेय किस वन अधिकारी को जाता है - पद्मश्री कैलाश सांखला - राजस्थान।
  20. ‘पृथ्वी सुरक्षाकोष‘ बनाने का प्रस्ताव किसने दिया था - स्व. राजीव गांधी।
  21. भारत के इतिहास में उस शासक का नाम बताइये, जिसने सर्वप्रथम वन्यजीव संरक्षण को आवश्यक महत्व दिया था - सम्राट अशोक।
  22. ‘पृथ्वी दिवस आयोजन‘ के प्रमुख प्रणेता कौन थे - सीनेटर गेलार्ड नेल्सन।
  23. 1972 में स्टाॅकहोम (स्वीडन) में राष्ट्रसंघ द्वारा ‘मानव पर्यावरण‘ पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया था - स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी।
  24. भारत में ‘वृक्षों का आदमी‘ किसे कहा जाता है - सुंदरलाल बहुगुणा।
  25. ‘पारिस्थितिकी विकास‘ नाम किसने दिया - मौरिस स्ट्रोंग।
  26. जल प्रदूषण की समस्या को पहचानने वाला सर्वप्रथम व्यक्ति कौन था - हिपोक्रेटस।
  27. पर्यावरण के इतिहास में शब्द ‘इकोलोजी‘ का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया माना जाता है - अरनेस्ट हैकेल - जर्मन विज्ञान वेत्ता - 1869 में।
  28. तेजाबी वर्षा की पहचान करने तथा उसके कारणों की जानकारी करने का श्रेय किस वैज्ञानिक को जाता है -आर.ए. स्मिथ।
  29. पर्यावरण एवं विकास विश्व आयोग में एक भारतीय को भी सम्मानीय सदस्य के रुप में सम्मिलित किया गया था। वक कौन थे - नगेन्द्र सिंह।
  30. भारतीय वन्यजीव बोर्ड के अध्यक्ष कौन होते हैं - पदेन भारत के प्रधानमंत्री।
  31. विश्व की यात्रा करने वाले प्रथम व्यक्ति का नाम बताइये - सर फ्रांसिस ड्रेक, अंग्रेज यात्री।
  32. दक्षिणी ध्रुव के अन्टार्टिका महाद्वीप पर सर्वप्रथम पहुंचने वाले खोजी का नाम बताइये - रोआल्ड एमन्डसन - 14 दिसम्बर, 1911।
  33. संयुक्त राष्ट्र द्वारा बनाये गये ‘पर्यावरण एवं विकास विश्व आयोग‘ का अध्यक्ष कौन था - श्रीमती जी.एच. ब्रटलैण्ड, नार्वे।


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Thursday, October 29, 2020

पर्यावरण के मूल घटक- स्थलमंडल, वायुमण्डल, जलमण्डल, जैवमण्डल

 पर्यावरण के मूल घटक

पर्यावरण को सम्पूर्ण रुप से समझने के लिए यह आवश्यक है कि पर्यावरण के मूल घटकों - स्थलमंडल, जलमंडल एवं जीवमंडल को समझा जाए। अतः इन घटकों का वर्णन निम्नलिखित है-

पर्यावरण के मूल घटक- स्थलमंडल, वायुमण्डल, जलमण्डल, जैवमण्डल
पर्यावरण के मूल घटक- स्थलमंडल, वायुमण्डल, जलमण्डल, जैवमण्डल


1. स्थलमंडल

स्थलमंडल पृथ्वी के उपरी परत को कहते हैं।

जिसके ऊपर हमारे महाद्वीप एवं समुद्री भाग स्थित हैं। महाद्वीप क्षेत्रों में यह सर्वाधिक मोटा है जहां इसकी औसत मोटाई 40 कि0मी0 है। समुद्री भागों में यह अत्यधिक पतला है जहां इसकी अधिकतम ऊंचाई 10 से 12कि0मी0 तक हो सकती है। स्थलमंडल पृथ्वी के सम्पूर्ण आयतन का लगभग 1 प्रतिशत और उसके कुल द्रव्यमान का 0.4 प्रतिशत है। 

यद्यपि स्थलमंडल में तकनीकी दृष्टि से पृथ्वी के ऊपरी भाग और समुद्री तल दोनों को ही शामिल किया जाता है फिर भी ज्यादातर इसका प्रयोग केवल भूमितल दर्शाने के लिए किया जाता है। इस दृष्टि से स्थलमंडल सम्पूर्ण पृथ्वी का 30 प्रतिशत और शेष 70 प्रतिशत भाग समुद्र ने ले लिया है।

स्थलमंडल का भू-पर्पटी सिलिका और एल्युमीनियम (SiAl) की प्रधानता वाले अवसादी एवं ग्रेनाइट चट्टानों से बना है। पृथ्वी के पर्पटी में 100 से अधिक तत्व पाये जाते हैं, किन्तु उसके लगभग 98 प्रतिशत भाग की संरचना में क्रमशः आक्सीजन 47 प्रतिशत, सिलिकन 27 प्रतिशत, एल्युमीनियम 8.13 प्रतिशत, लोहा 5 प्रतिशत, कैल्सियम, सोडियम , पोटैशियम और मैग्नीशियम को योगदान होता है। स्थलमंडल में 87 प्रतिशत खनिज सिलिकेट है। स्थलमंडल के चट्टानों का वर्गीकरण आग्नेय अवसादी तथा रुपान्तिरित चट्टानों में किया गया है। 

इन विभिन्न प्रकार के चट्टानों के अपक्षय से विभिन्न प्रकार के मृदा का निर्माण हुआ है और मृदा (Soil) ही पर्यावरण के सम्पूर्ण जीव जगत के भोजन का मूल स्त्रोत है। बेसाल्ट चट्टान से प्रायद्वीपीय भारत के पश्चिमोत्तर भाग का डेक्कन ट्रेप का निर्माण हुआ है। बेसाल्ट के अपक्षय से ही काली या रेगुर मृदा का निर्माण इस क्षेत्र में हुआ है। 

पृथ्वी के स्थलमंडल का लगभग तीन चैथाई भाग अवसादी चट्टानों से ढका है। पौधों और जानवरों के अवशेषों से उत्पन्न जैव पदार्थ भी अवसादी चट्टानों का निर्माण करते हैं। कोयला और चूने का पत्थर जैविक उत्पत्ति वाली अवसादी चट्टानों के अच्छे उदाहरण हैं।

जब दाब, ताप आदि कुछ बाह्य शक्तियों द्वारा चट्टानों के मूल लक्षण में आंशिक अथवा पूर्ण परिवर्तन होता है तो उन्हें हम रुपान्तरित चट्टानें कहते हैं। जैसे कोयला का ग्रेफाइट में तथा चूना पत्थर का संगमरमर में रुपान्तरण।


2. वायुमण्डल

पृथ्वी को चारों ओर से आवरण की तहर घेरे हुए हवा के विस्तृत भंडार को वायुमंडल कहते हैं। वायुमंडल पृथ्वी से गुरुत्वाकर्षण द्वारा बंध हुआ है। चन्द्रमा जैसा उपग्रह जिसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति बहुत कम होती है, वायुमंडल को धारण नहीं कर सकता है। 

वायुमंडल के द्वारा ही जन्तुओं के श्वसन के लिए आक्सीजन तथा पौधों के प्रकाशसंश्लेषण के लिए कार्बन डाइआक्साइड जैसी जीवनदायिनी गैसें प्राप्त होती है। वायुमंडल एक तरह के 'कांच घर' का भी कार्य करता है जिससे सौर विकिरण के लघु तरंगों को पृथ्वी के धरातल पर आने देता है लेकिन धरातल से विकिरित होने वाली लम्बी तरंगों को बाहर जाने से रोकता है जिसमें पृथ्वी को औसत तापमान बना रहता है।

वायुमंडल में विभिन्न गैसें और जलवाष्प होते हैं और अपने सर्वाधिक उपरी भाग में यह परमाणविक कणों से आवेशित होते हैं। पृथ्वी से 50 कि0मी0 की दूरी तक वायुमंडल में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत आक्सीजन, 0.93 प्रतिशत आर्गन, 0.03 प्रतिशत कार्बन डाई-आक्साइड तथा हाइड्रोजन और ओजोन गैस होती है।

निम्न वायुमंडल में लगभग 12 कि0मी0 तक 0.01 से लकर 1 प्रतिशत तक की सांद्रता में जलवाष्प होता है। यद्यपि वायुमंडल में जलवाष्प का परिमाण काफी कम होता है, फिर भी इसका अत्यधिक महत्व है क्योंकि वायुमंडल में पानी के बिना पृथ्वी पर कोई मौसम नहीं होता।

जलमंडल से वाष्पन के द्वारा और पौधों के पाष्पोत्सर्जन के जरिए पानी वायुमंडल में प्रवेश करता है और हिम एवं वर्षा के रुप में पुनः स्थलमंडल एवं जैवमंडल को प्राप्त होता है। इस प्रकार से यह चक्र निरन्तर चलता रहता है।


3. जलमण्डल

अनुमानतः जलमंडल में लगभग 1.46 अरब घन कि0मी0 पानी है । इसमें से 97.3 प्रतिशत महासागरों में एवं सागरों में है। शेष 2.7 प्रतिशत हिमनदी, झीलों, तालाबों, नदियों और भूमिगत जल के रुप में पाया जाता है।

महासागर-

महासागर पृथ्वी के कुल धरातल क्षेत्रफल के 70.8 प्रतिशत भाग को आच्छादित किए है और इनमें 144.5 करोड़ घन कि0मी0 पानी है। सौर ताप महासागर के जल को गतिशील रखता है। भू-मध्यरेखीय क्षेत्र में सूर्य पानी को गर्म कर देता है। जिससे यह फैलकर कुछ इंच उपर उठ जाता है।

महासागरीय क्षेत्र को चार महासागरों में वर्गीकृत किया गया है-

प्रशान्त महासागर, अटलांटिक महासागर तथा आर्कटिक महासागर। महासागरों में सबसे बड़ा और पुराना है प्रशान्त महासागर। पृथ्वी के क्षेत्रफल के 35.25 प्रतिशत भाग पर यह फैला है। प्रशान्त महासागर का 'मैरियाना ट्रेंच' सबसे गहरा गर्त है। प्रशान्त महासागर में आस्ट्रेलिया के क्वींसलैण्ड के समीप संसार की सबसे बड़ी प्रवाल भित्ति पायी जाती है जो ‘ग्रेट बैरियर रीफ' के नाम से प्रसिद्ध है। महासागरीय जल की लवणों की कुल मात्रा में 77.5 प्रतिशत मात्रा सोडियम क्लाराइड की होती है।


महासागरीय जीवन-

समुद्री पर्यावरण में अनेक प्रकार की जैव समुदाय पाए जाते हैं। प्रकाश की तीव्रता, गहराई, समुद्री धाराएं, पोषक पदार्थ तथा जल में घुली गैस आदि कुछ ऐसे कारक हैं जो महासागरों के जीवन को प्रभावित करत हैं। समुद्री पर्यावरण मेें जैवमंडल के उपरी भाग को पैलेजिक तथा महासागरीय नितल को बेथिक क्षेत्र कहते हैं। समुद्री जीव के लिए नैरेटिक क्षेत्र सर्वाधिक महत्व का होता है।

नैरेटिक क्षेत्र की गहराई 200 मीटर से कम होती है और इसमें समुद्री जीवों की आबादी सबसे अधिक होती है। समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में शैवाल उत्पादक वर्ग के जीव हैं विभिन्न प्रकार के समुद्री शैवाल से ही जलीय जन्तुओं को भोजन प्राप्त होता है जिसे फाइटोप्लेंकटन कहा जाता है। उत्तरी अटलांटिक महासागर का सारगेसो सागर का नामकरण सारगौसो एल्गी के नाम पर रखा गया है।


4. जैवमण्डल

जैवमंडल से तात्पर्य पृथ्वी के उस भाग से है जहां जीवन पाया जाता है। जैवमंडल की परत पतली किन्तु अत्यधिक जटिल है। जैवमंडल की संकल्पना को सर्वप्रथम आस्ट्रेलियन वैज्ञानिक एडवर्ड सुएस ने प्रस्तावित की थी।

जैवमंडल का विशिष्ट लक्षण यह है कि जीवन को आधार प्रदान करती है। जैवमंडल में विभिन्न आकार के जीव पाए जाते है। ये जीव सूक्ष्म जीवाणु से लेकर विशालकाय व्हेल अथवा बड़े वृक्ष के आकार तक के होते हैं। जैवमंडल के सभी जीवों को तीन मुख्य वर्गों में बांटा गया है-

1.जन्तु समुदाय

2.वनस्पति समुदाय 

3.सूक्ष्म जीवी

जन्तु समुदाय में प्रोटोजोआ संघ के छोटे जन्तु से लेकर हाथी और व्हेल जैसे बड़े जीव-जन्तु आते हैं। जन्तु समुदाय का संघ (Phylum) आर्थोपोडा या कीट वर्ग संसार का सबसे बड़ा संघ है। जो कुल जन्तु जगत की ज्ञात जातियों की 80 प्रतिशत से भी अधिक संख्या प्रदर्शित करती है। कीट वर्ग का बाह्य कंकाल, काइटिन युक्त क्यूटिकल का बना होता है। मोलस्का संघ के जन्तु जैसे घोंघा, सीप, मोती, कटल फिश  का बाह्य आवरण कैल्सियम कार्बोनेट का बना होता है।

वनस्पति समुदाय में विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे आते है। वनस्पति समुदाय की कोशिका भित्ति सेलुलोज की बनी होती है। जैवमंडल में वनस्पति समुदाय उत्पादक वर्ग में आते हैं जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण करते हैं।

जैवमंडल में सूक्ष्मजीवी के अन्तर्गत जीवाणु, विषाणु तथा कवक आदि सूक्ष्म जीव आते हैं। जीवाणु ;ठंबजमतपंद्ध सूक्ष्मदर्शी जीव होते हैं। जीवाणु एक कोशकीय , सूक्ष्म प्रोकैरियोटिक वर्ग के अन्तर्गत आते हैं। जीवाणुओं में पोषण मृतोपजीवी, सहजीवी, परजीवी एवं स्वपोषित प्रकार से होता है। कुछ जीवाणु जैसे रोएडोस्पिरिलम, क्रोमोटिम आदि पौधों की भांति प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाकर स्वपोषित वर्ग में स्थान रखते हैं जीवाणुओं के इन विविध पोषण विधि के कारण ही इन्हे  जैव उद्विकास में पौधों और जन्तुओं के बीच की कड़ी माना जाता है।

 विषाणु (Virus) अति सूक्ष्म न्यूक्लियो प्रोटीन के कण होते हैं। विषाणु की एक सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह होती है कि ये केवल दूसरे जीवित कोशिकाओं के सम्पर्क में आने पर ही जनन करते हैं अन्यथा निर्जीव की भांति पड़े रहते हैं।

इसी कारण से विषाणु को जीवित और निर्जीव के बीच की कड़ी माना गया है। विषाणु के द्वारा मानव में एड्स, हेपेटाइटिस, रैबीज, इन्फ्लुएंजा, पोलियो, चेचक, खसरा, डेंगू ज्वर, मेनिनजाइटिस जैसे घातक रोग होते हैं। पौधों में मोजैक रोग विषाणु के द्वारा ही होता है।

इस प्रकार से जीवमंडल में शैवाल, कवक से लेकर उच्चतर वर्ग के पौधों की लगभग साढ़े तीन लाख जातियां हैं तथा एक कोशिकी प्राणी प्रोटोजोआ से लेकर मनुष्य तक एक करोड़ दस लाख प्रकार की प्राणी प्रजातियां सम्मिलित हैं । जीवमंडल इस सभी के लिए आवश्यक सामग्री जैसे- प्रकाश ताप, पानी, भोजन तथा आवास की व्यवस्था करता है।

उपर्युक्त वर्णन से यह स्पष्ट है कि पर्यावरण की अपनी लय एवं गति होती है जो विभिन्न घटकों के आपसी अन्तःक्रिया के आधार पर संतुलित रहता है। पर्यावरण में अनेक प्रकार के भौतिक और जैविक घटकों को संतुलन बहुत पहले से ही क्रियाशील रहा है। जीवन की इस निरंतरता के मूल में  अन्य संबंधों का एक सुगठित तंत्र काम करता है। वायु, जल, मनुष्य, जीव-जन्तु, वनस्पति, मिट्टी, सूक्ष्म जीव ये सब जीवन धारण प्रणाली में दृश्य एवं अदृश्य रुप से एक दूसरे से गुथे हुए हैं और यह व्यवस्था पर्यावरण कहलाती है।


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पर्यावरण से आशय | Paryavaran Se Kya Aashay hai

 पर्यावरण से आशय

पर्यावरण से आशय | Paryavaran Se Kya Aashay hai

 पर्यावरण से आशय


    पर्यावरण से तात्पर्य एक ऐसे आवरण से है जिसके द्वारा सम्पूर्ण ब्रहाण्ड और जीव जगत घिरा हुआ है। पर्यावरणका शाब्दिक अर्थ होता है, हमारे चारों ओर का छाया या आवरण (परि + आवरण = पर्यावरण)

     हमारे इस छाया या आवरण से तात्पर्य वायुमंडल, जलमंडल एवं जीवमंडल के बीच एक ऐसा प्राकृतिक संतुलन जिससे पृथ्वी पर जीवन के लिए अनुकूलतम दशाएं उपलब्ध हो सके। इस प्रकार से स्पष्ट है कि पर्यावरण किसी एक घटक का नाम नहीं होकर अनेक घटकों का एकीकृत नाम है जो सम्पूर्ण जीव जगत को नियंत्रित करते है और एक दूसरे से अन्तर्सम्बन्धित हैं।

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Friday, October 16, 2020

शिक्षक की गरिमा मत भूलो, अमृत है उसकी वाणी में। - Hindi Kavita

शिक्षक की महिमा

शिक्षक की गरिमा मत भूलो, अमृत है उसकी वाणी में। - Hindi Kavita


शिक्षक की गरिमा मत भूलो, अमृत है उसकी वाणी में।

वह ही सच्चा निर्माता है, वह अन्र्तनिहित है सब प्राणी में।।


उसकी कृपा दृष्टि पाकर, मन के विकार मिट जाते हैं।

उसके ही गुण गाकर, पशु से मानव बन जाते हैं।।


उसके बिन मनुज अधूरा है, पूरा उसका उत्थान नहीं।

उसकी अनुकम्पा बिन मनुष्य को, मिल सकता कुछ ज्ञान नहीं।


वह नाशक है तम माथे का, अन्याय का प्रतिरोधक है।

वह गुणी-गुणों का है आधार, वह नवीनता का द्योतक है।।


उसकी गरिमा गुरुता पाकर, जग में कृष्ण महान बने।

उसकी क्षमता को अपनाकर, श्री रामचन्द्र भगवान बने।।


उसकी मन्त्रणा के अनुचर बन, चन्द्रगुप्त सम्राट बने।

उसका ही सम्बल पाकर के, शिवाजी वीर सम्राट बने।।


गुरु की कृपा यदि रहे तो , कंटक पथ के हट जाते हैं।

गुरुवर की कृपा यदि रहे तो, रोग-शोक सब मिट जाते हैं।।


उसकी गुरुता, गरिमा, महिमा, स्वीकार करो-स्वीकार करो।

उसका तन-मन-धन से, सम्मान करो-सम्मान करो।

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प्यारी-दुलारी मेरी गुड़िया सबके मन को भाती गुड़िया। - Hindi Kavita

 कविता - मेरी गुड़िया

प्यारी-दुलारी मेरी गुड़िया  सबके मन को भाती गुड़िया। - Hindi Kavita


प्यारी-दुलारी मेरी गुड़िया

सबके मन को भाती गुड़िया।

मटक-मटक के नाच दिखाती।

सुन्दर-सुन्दर गाना गाती।

प्यारी-दुलारी मेरी गुड़िया।


पहने वह लाल घंघरिया।

काली-काली मोटी-मोटी अंखिया।

लम्बी सी प्यारी एक चुटिया,

सबसे न्यारी है यह गुड़िया।

प्यारी-दुलारी मेरी गुड़िया।


सुबह उठाकर रोज नहलाती।

दुल्हन जैसी मैं उसको सजाती।

रात को अपने पास सुलाती।

प्यारी-दुलारी मेरी गुड़िया।

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मैं गुलाब हूं, मैं गुलाब हूं, सब फूलों में मैं नवाब हूं! - Kavita

 कविता- मैं गुलाब हूं

मैं गुलाब हूं, मैं गुलाब हूं,  सब फूलों में मैं नवाब हूं! - Kavita

मैं गुलाब हूं, मैं गुलाब हूं,

सब फूलों में मैं नवाब हूं,

पुष्प् वाटिका की शोभा मैं।

उपवन का गर्वीला राजा।।


मुझे हाथ में लेकर देखो

कितना कोमल कितना ताजा।

मैं तितली रानी का प्यारा

भौंरे की आंखों का तारा।


मुझ पर सभी निछावर होते,

मेरा रुप रिझावन हारा।।

मेरी मधुर सुगंध चुराकर,

पवन दूर तक हौले  जाती।


मेरी मधु-मुस्कान देखकर,

किसकी आंख नहीं ललचाती।

पहले जो गौरव पद पाया,

जनमानस में नीलकमल ने।


मुझे वही पद दिलवाया है

सर्वप्रथम मुमताज महल ने।।

अब तो सभी मानते हैं यह ,

मुझसा कोई फूल न दूजा।


मुझसे सब सार्थक करते 

अपने इष्टदेव की पूजा ।।

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फूल चुनते चमन से सभी है, तुम कांटे उठाकर तो देखो। - Hindi Ghazal

गजल

फूल चुनते चमन से सभी है, तुम कांटे उठाकर तो देखो। - Hindi Ghazal


फूल चुनते चमन से सभी है, तुम कांटे उठाकर तो देखो।

आज हर एक परेशां यहां पर, तुम उमंग से मुस्करा कर तो देखो।


मैंने माना मसीहा नहीं हो, फिर भी सच है कि इन्सान ही सब।

उसी इन्सानियत की कसम है, गम किसी का उठाकर तो देखो।


इल्मतालीम ही जिन्दगी है, जानकर भी न अन्जान बनिए।

ग्रन्थ-वेद और कुरान यही कहते, कुछ पढ़ो कुछ पढ़ाकर तो देखो।


दानिशों का असर आ गया तो, नाम मरकर अमर होगा यारों।

कहां तक बयां करते जाएं, तुम जरा इस पर चलकर तो देखो।

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भूलो सभी को मगर मां बाप को भूलना नहीं। - Hindi Kavita

मां बाप को भूलना नहीं

भूलो सभी को मगर मां बाप को भूलना नहीं। Hindi Kavita


भूलो सभी को मगर मां बाप को भूलना नहीं।

उपकार अगणित है उनके, इस बात को भूलना नहीं।।


पत्थर पूजे कई तुम्हारे जन्म के खातिर अरे।

पत्थर बन मां बाप का दिल कभी कुचलना नहीं।।


मुख का निवाला दे अरे जिसने तुम्हे बड़ा किया ।

 अमृत पिलाया तुमको जहर उनके लिए उगलना नहीं।।


दिया है कितना प्यार और अरमान भी पूरे किये।

पूरे करो अरमान उनके बात यह भूलना नहीं।।


लाखों कमाते हो भले मां बाप से ज्यादा नहीं।

संतान से सेवा चाहोख् तो संतान बन सेवा करो।।


जैसी करनी वैसी भरनी न्याय यह भूलना नहीं।

जिसने बिछाये थे फूल हरदम तुम्हारी राहों में।।


उस रहबर की राह के कंटक कभी बनना नहीं।

धन तो मिल जायेगा मगर मां-बाप क्या मिल पायेंगे।


गंगा से पावन उन चरणों की, चाह कभी भूलना नहीं।।


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Sunday, October 11, 2020

Teacher is a just like a candle That burns itself to give lights to others.

 To The Teacher

Teacher is a just like a candle  That burns itself to give lights to others.


Teacher is a just like a candle

That burns itself to give lights to others.

I was a drop of a water.

You made me prudent,

I was less than a human too.

People may say that God is one,

But I say they are two

One is in the heaven

One on the earth.

It is only you.


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Health is Wealth - Follow Steps to Make Healthy

Health is Wealth - Follow Steps to Make Healthy

  1.  God has given nose for breathing, so we should always breather through nose not mouth.
  2. (Yoga) is the basis of the long life. So, to live a longer life yoga is necessary.
  3. We should work according to our physical capability.
  4. We should eat food slowly by chewing it properly. God has given teeth only for this.
  5. We should not eat anything very hot and very cold.
  6. Anger, sadness and tension always harm our body, we  should try to get rid of them.
  7. A person who eats food twice and takes breakfast I twice a day timely remains healthy.
  8. Give the preference to green vegetables and salads. Always drink hot milk before sleeping to clean the stomach next morning.
  9. Before sleeping we should wash our feet with luke warm water and wipe it with clean cloth, while sleeping we should wear loose and comfortable clothes.
  10. A person who eats light food does not visit doctor, so we always try to eat light food.
  11. We should drink atleast 10 to 15 glasses of water every day.
  12. We should never sleep by keeping our legs towards south direction , because it can harm our mind and heart.
  13. Wake up before two hours from sunrise and drink two glasses of water kept in copper vessel, it should be equal to body temperature.

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Friendship is an art of beauty- Friendship

 Friendship

Friendship is an art of beauty- Friendship


Friendship is an art of beauty,

In which everyone has a duty.

It is like a ball, which

Rolls and goes into another heart.

It is like a game

Play it you are sure to win,

Friendship is a combination of hearts.

In which each individual plays a part.

Friendship is like a gold.

which never be sold,

It is like a seed

which germinates and grows at great speed.

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The History of 26th January

The History of 26th January
  1.  On 26th January, 1175 - Mohammad Gauri conquered Multan.
  2.  On 26th January, 1333 - IBN Bauta came in India.
  3.  On 26th January, 1530 - The first Mughal Emperor died.
  4.  On 26th January, 1740 Nadir Shah entered Delhi.
  5.  On 26th January, 1853 - Railway system was first Introduced in India.
  6.  On 26th January, 1881 - Telephones were first introduced in India.
  7.  On 26th January, 1554 - Jahangir was born.
  8.  On 26th January, 1950 - The Indian Constitution came into being and India became a Republic.
  9.  On 26th January, 1972 - Mrs. Indira Gandhi was awarded the "Bharat Ratna".
  10.  On 26th January, 1988 - M.G. Ram Chandra was awarded the "Bharat Ratna" after his death.

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Tree Tree Tree Gives us fruits free....

 Tree Tree Tree


Tree Tree Tree Gives us fruits free


Tree Tree Tree 
Gives us fruits free
Flowers and buds
Shelter for birds
Shadow for sitting
And wood for fueling
You clean the air
To live in fair
You are friend in need
Our friend indeed.

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Friendship is a song that every heart sings...

 Best Friend

Friendship is a song that every  heart sings...


Friendship is a song that,
every heart sings.
A friend is one who hears.
song even when you do not sing.

No distance counts in.
friendship.
It is only emotions that
bind friends.

Getting a good friend is.
not a matter of chance.
But is the result of good.
deeds.

For me the meaning of,
a good friend is still a question!
Because my heart doesn't,
believe in choosy selection.

The friend for whom my,
heart is full of affection.
Is a person who lives,
away from anyone's realization.




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Thursday, October 1, 2020

जो व्यक्ति किसी दूसरे के चेहरे पर हंसी.......

 आज का विचार

आज का विचार
 आज का विचार


जो व्यक्ति किसी दूसरे के चेहरे पर हंसी.......

और जीवन में खुशी लाने की क्षमता रखता है......

उसके अपने चेहरे से कभी हंसी.......

और जीवन से खुशी कम नहीं होती...।


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