Thursday, December 24, 2020

शैशवावस्था

     शैशवावस्था


    शैशवावस्था
    शैशवावस्था


    1. जन्म से लेकर 6 वर्ष की आयु होती है - शैशवावस्था
    2. समाजीकरण की प्रक्रिया के प्रारम्भ होने की अवस्था है -शैशवावस्था
    3. थार्नडाइक के विचार है - 3 से 6 वर्ष तक बच्च अर्द्ध - स्वप्नों में रहता है 
    4. एक नवजात शिशु का कद होता है - लगभग 51 सेमी या 20 इंच
    5. एक नवजात शिशु का भार होता है - 6 से 8 पाउंड
    6. शैशवास्था को सीखने का आदर्शकाल कहा है - वेलेन्टाइन
    7. सबसे तेज शारीरिक विकास होता है - शैशवास्था
    8. विकास की प्रक्रिया होती है - गर्भावस्था से लेकर जीवनपर्यन्त तक
    9. शैशवावस्था में वृद्धि - तीव्र होती है 
    10. जन्म से किशोरावस्था तक की गतिविधियों को - बालमनोविज्ञान कहते हैं
    11. व्यक्तित्व विकास की नीव पड़ती है - शैशवावस्था में
    12. शैशवावस्था में चार संवेग होते हैं - भय, क्रोध, प्रेम, पीड़ा
    13. "शैशवावस्था द्वारा जीवन का पूरा क्रम निश्चित होता है" कथन है - एडलर का
    14. "मनुष्य को जो कुछ बनना होता है प्रारम्भ के चार पांच  वर्षाें में पता चल जाता है" कथन है - सिगमड फ्रायड
    15. शैशवावस्था को बालक का कहा जाता है - निर्माण काल
    16. दूध के दांत होते है - 20
    17. नवजात शिशु में हड्डियों की संख्या लगभग होती है - 270
    18. कौन सी अवस्था में दोहराने की प्रवृत्ति तीव्र होती है - शैशवावस्था में
    19. फ्रायड के अनुसार लड़कियों में कौन सी ग्रन्थि पायी जाती है - इलेक्ट्रा ग्रन्थि
    20. फ्रायड के अनुसार लड़कों में कौनसी ग्रन्थि पायी जाती है - ओडिपस ग्रन्थि
    21. कितने वर्ष में सभी दूध के दांत निकल आते है - एक वर्ष में
    22. स्वप्रेम की भावना का विकास होता है - शैशवावस्था
    23. जन्म के समय शिशु की धड़कन रहती है - अनियमित
    24. हड्डियों में कौन से तत्व पाये जाते हैं - कैल्शियम, फास्फोरस और खनिज तत्व
    25. कितने वर्ष का बच्चा सार्थक शब्दों को प्रयोग करने लगता है - 3 वर्ष
    26. बालक के विकास की प्रक्रिया एवं विकास की शुरूआत होती है - गर्भावस्था से
    27. विकास की प्रक्रिया चलती है - जीवनपर्यन्त
    28. जन्म के समय बालक, बालिका से लगभग - 1/2 सेमी लम्बा होता है 
    29. किस अवस्था में दांत बनना शुरू होते हैं - जन्म से पूर्व 
    30. शैशवावस्था का नियत समय है - जन्म से 6 वर्ष तक
    31. स्वकेन्द्रित अवस्था होती है - शैशवावस्था
    32. शिक्षा की किण्डरगार्टन पद्धति का प्रतिपादन किया था - फ्रोबेल ने
    33. भूख और प्यास है - जन्मजात प्रेरक
    34. बालक की प्रथम पाठशाला है -परिवार
    35. गर्भ में बालक का विकसित होने में दिन लगते हैं - 280 दिन
    36. वर्तमान में बच्चों की निःशुल्क शिक्षा के लिए कहा गया है - समावेशी शिक्षा
    37. डाल्टन प्रणाली के जन्मदाता हैं - मिस हेलेन पार्कहस्र्ट
    38. वंशानुक्रम में आनुवांशिक लक्षण आते है - 1/2 पिता पक्षा तथा 1/2 माता पक्ष
    39. शैशवावस्था की प्रमुख मनोवैज्ञानिक विशेषता है - मूल प्रवृत्यात्मक व्यवहार
    40. कैलीकाक परिवार का अध्ययन किसने किया है - गोडार्ड ने
    41. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था का काल होता है - 7 से 11 वर्ष
    42. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार छोटे बच्चों को किस आयु में स्कूल भेजना चाहिए - 5 वर्ष
    43. सामान्य बालक किस आयु में ध्वनि उच्चारण शुरू करते है  -9 से 15 माह के मध्य
    44. जन्म के समय शिशु के मस्तिष्क का भार होता है - 500 ग्राम
    45. जन्म में समय बच्चे का संवेगात्मक विकास होता है - उत्तेजनापूर्ण


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    Tuesday, December 15, 2020

    बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक

    "वंशानुक्रम में वे सभी बातें समाहित रहती हैं जो जीवन का आरम्भ करते समय, जन्म के समय नहीं वरन जन्म से लगभग नौ माह पूर्व गर्भाधान के समय व्यक्ति में उपस्थित थी।" - वुडवर्थ

    अर्थात् 

    वे सभी गुण जो बालक को अपने माता पिता या वंश परंपरा से जन्मजात प्राप्त होते हैं, वे वंशानुक्रम के अंतर्गत आते हैं।

     

    बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक
     बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक

     

    वंशानुक्रम के नियम

    1. समानता का नियम
    2. भिन्नता का नियम
    3. प्रत्यागमन का नियम
    4. चयनित गुणों का नियम
    5. मातृ एवं पितृ पक्षों का नियम
    6. संयोग का नियम
    7. बीज कोष की निरन्तरता का नियम
    8. मेन्डल का नियम

    "वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त बाह्य शक्तियों, प्रभावों तथा दशाओं को सामूहिक रूप से वर्णित करने के लिए किया जाता है जो जीवित प्राणियों के जीवन, स्वभाव, व्यवहार तथा बुद्धि, विकास व परिपक्वता को प्रभावित करता है।" - डगलस के अनुसार

    "माता- पिता की शारीरिक  एवं मानसिक विशेषताओं का सन्तानों में हस्तांतरण होना वंशानुक्रम" कथन है। -जेम्स ड्रेवर

    1. प्रतिभाशाली माता-पिता के सन्तान कम प्रतिभाशाली तथा निम्न कोटि के माता-पिता के संतान उच्च प्रतिभाशाली होने की प्रवृत्ति कहलाती है - प्रत्यागमन
    2. जब माता-पिता के बच्चे उसके विपरीत विशेषताओं वाले विकसित होते हैं - प्रत्यागमन
    3. वंशानुक्रम व्यक्ति की जन्मजात विशेषताओं का पूर्ण योग है - बी0एन0 झा
    4. वातावरण का किस दृष्टि से सबसे अधिक महत्व है - व्यक्तिगत निर्माण
    5. रूसो के शिक्षक संबंधी विचार पुस्तक से मिलते हैं - एमील
    6. Democracy and Education पुस्तक लिखी है - जाॅन डेवी
    7. एक सफल अध्यापक के लिए अधिक आवश्यक है - विषयवस्तु का समुचित ज्ञान 
    8. "मनुष्य स्वतन्त्र पैदा होता है, किन्तु वह बाद में सब ओर से जंजीरों से बांध दिया जाता है" यह कथन है - रूसो
    9. एक संतान में माता-पिता के अतिरिक्त पूर्वजों के गुण या लक्षण आते हैं - 1/2 माता-पिता, 1/4 दादा-दादी, 1/8 परदादा-दादी, 1/16, 1/32 शेषांश अन्य पूर्वजों से
    10. वंश दर वंश या गुण कम होते जाते हैं - 1/2, 1/4,1/8, 1/16, 1/32 आदि
    11. वंशानुगत रोग है - वर्णांधता, हीमोफिलीया
    12. लाल व हरा रंग में भेद नहीं कर पाता है - वर्णान्धता का रोगी
    13. मनुष्य में चोट लगने या कट जाने पर रूधिर स्त्राव बन्द न होना बिमारी है - हीमोफिलीया का
    14. वंशानुक्रम की इकाई है - जीन
    15. विकासवादी सिद्धान्त का समर्थक था - लैमार्क
    16. वंशानुगत सिद्धान्त के जनक थे -ग्रेगर जान मेण्डल
    17. ग्रेगर जान मेण्डल ने आनुवांशिकी का सिद्धान्त किस पौधे पर खोज किया - मटर पर
    18. कौन सा कारक बाल विकास को मुख्य रूप से प्रभावित करता है - आनुवांशिकता
    19. शिशु की औपचारिक संस्था है - विद्यालय
    20. अच्छे नैतिक चरित्र का विकास संभव है - शिक्षा द्वारा
    21. कौन-सी क्षमता या गुण वंशानुक्रम जनित है - बुद्धि
    22. बालक की प्रारंभिक अवस्था में बालक के जीवन पर किसके वातावरण का सबसे अधिक प्रभाव होता है - घर का 
    23. वातावरण की दृष्टि से सबसे अधिक महत्व है - व्यक्तित्व निर्माण में 
    24. भाषा-विकास पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है - घर का 
    25. पाइसम सेटाइवम वैज्ञानिक नाम है  - मटर  का
    26. वंशानुगत गुण है - जन्मजात
    27. संतान को पिता से जीन प्राप्त होते हैं - 50 प्रतिशत
    28. वर्णान्ध व्यक्ति लाल व हरे रंग में भेद नहीं कर सकता  इसे कौन सा दोष कहा जाता है - प्रोटीन दोष
    29. वर्णान्ध व्यक्ति नहीं बन सकता है - कलाकार
    30. व्यवहार के रचनातंत्र का निर्माण होता है - वंशानुक्रम में 
    31. वंशानुक्रम सिद्धान्त का बीज रूप प्राप्त होता है - अरस्तू के कथन में
    32. मेण्डल का वंशानुगत सिद्धान्त प्रकाशित हुआ था - 1866 में
    33. वंश परंपरा के मुख्य वाहक हैं - पि़त्रैक (Gene)
    34. रुचियों, मूल प्रवृत्तियों एवं स्वाभाविक आवेगों का स्वस्थ विकास हो सकता है -स्वच्छ वातावरण द्वारा
    35. भ्रूण  में कितने क्रोमोसोम होते हैं - 46
    36. आंखों व त्वचा का रंग होता है - फोनोटाइप
    37. नर क्रोमोसोम है - XY 
    38. मादा क्रोमोसोम है - XX 
    39. निषेचित अण्डा कहलाता है - भ्रूण
    40. जन्म से पूर्व काल में कितनी अवस्थाएं होती हैं - 3
    41. सबसे छोटी कोशिका कौन सी है - शुक्राणु
    42. सबसे बड़ी कोशिका कौन सी है - ओवम या अण्डा
    43. भू्रण काल होता है - 2 से 8 सप्ताह
    44. लड़का या लड़की होना निर्धारित होता है - नर शुक्राणु द्वारा
    45. वंशक्रम संबंधी नियम हैं - समानता का नियम, विभिन्नता का नियम, प्रत्यागमन का नियम
    46. शिक्षा प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है - छात्र
    47. "मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना शिक्षा है" - स्वामी विवेकानन्द
    48. शिक्षा का अर्थ उन सर्वमान्य विचारों को विकसित करना है जो प्रत्येक मनुष्य के मस्तिष्क में विलुप्त होती है - सुकरात
    49. "स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण करना ही शिक्षा है" - अरस्तू
    50. विद्या से अमरत्व की प्राप्ति होती है कहां पर उल्लेख किया गया है - यजुर्वेद
    51. शिक्षा कैसा विज्ञान है - नियामक
    52. मनोविज्ञान की प्रकृति होती है - वैज्ञानिक
    53. किसके अनुसार - "मनोविज्ञान चेतना का विज्ञान है" - जेम्स
    54. मनोविश्लेषणवाद के प्रतिपादक हैं - फ्रायड
    55. शिक्षा मनोविज्ञान की परिधि - शिक्षक, शिक्षार्थी, पाठ्यक्रम
    56. शिक्षा मनोविज्ञान के तीन क्षेत्र - अधिगमकर्ता, अधिगम और अधिगम दशाएं।
    57. मनोविज्ञान की सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली विधि है - निरीक्षण विधि
    58. शिक्षा मनोविज्ञान का अध्ययन अध्यापक को इसलिए करना चाहिए ताकि - अपने शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बना सके
    59. शिक्षा मनोविज्ञान में अध्ययन किया जाता है - मानव व्यवहार की शैक्षणिक परिस्थितियों का
    60. शिक्षा को मनोविज्ञानिक आधार की आवश्यकता क्यों है - बालकों के आंतरिक एवं बाह्य गुणों का पता लगाने तथा शैक्षिक समस्याओं के समाधान हेतु
    61. शिक्षा की दृष्टि से बालक महत्वपूर्ण आवश्यकता है - बालकों के साथ मनोवैज्ञानिक व्यवहार
    62. "शिक्षा-मनोविज्ञान शिक्षण विधियों के चयन में शिक्षक की सहायता करता है कथन है" -स्किनर का
    63. मनोविज्ञान का वास्तविक अर्थ है -व्यवहार का विज्ञान
    64. मनोविज्ञान है - विधायक विज्ञान
    65. निरीक्षण विधि में किया जाता है - दूसरों का अध्ययन
    66. मनोविज्ञान की उचित विषयवस्तु है - व्यवहार
    67. "मनोविज्ञान शिक्षा का आधारभूत विज्ञान है"  कथन है - स्किनर
    68. शिक्षा मनोविज्ञान का केन्द्र है - बालक
    69. शिक्षा के तीन ध्रुव कौन-कौन से हैं - शिक्षक, शिक्षार्थी, पाठ्यक्रम
    70. वैदिक काल में शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य था - मोक्ष की प्राप्ति
    71. वैदिक काल में शिक्षा का आरम्भ किस संस्कार से होता था - उपनयन संस्कार
    72. समावर्तन के समकक्ष संस्कार है - उपसम्पदा
    73. मुस्लिम काल में प्रारंभिक शिक्षा दी जाती थी - मकतब में
    74. इस  समय शिक्षा संविधान की किस सूची में है - समवर्ती सूची में
    75. शिक्षा में सर्वाधिक जटिल समस्या है - प्राथमिक शिक्षा की
    76. वर्तमान समय में विद्यमान आवासीय विद्यालयों की तरह प्राचीन समय के स्कूल थे - गुरुकुल
    77. नर्सरी स्कूल के प्रारम्भकर्ता थे - फ्रोबेल
    78. नवोदय विद्यालय का गठन किसके लिए किया गया - 75 प्रतिशत ग्रामीण और 25 प्रतिशत शहरी मेधावी बच्चों के लिए
    79. आपरेशन ब्लैक बोर्ड में प्रावधान है - दो शिक्षक दो कमरों का
    80. आपरेशन ब्लैक बोर्ड संबंधित है - प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम सुविधाओं से
    81. डाइट (DIET) का गठन किसके लिए किया गया - प्राथमिक शिक्षकों के लिए
    82. बच्चों का सही मूल्यांकन होता है - मासिक परीक्षा में 
    83. मूल्यांकन का सर्वोत्तम रुप है - सतत एवं व्यापक मूल्यांकन
    84. प्रश्नपत्र का सही रूप है - पहले आसान और बाद में कठिन प्रश्न
    85. एक अच्छे मूल्यांकन के तीन महत्वपूर्ण गुण  हैं- वैधता, व्यापकता, विश्वसनियता
    86. मापन होता है - मात्रात्मक
    87. मूल्यांकन के पक्ष होते हैं - तीन
    88. शिक्षक-दिवस किसके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है - डाॅ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन


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    Monday, December 14, 2020

    कल्पना - कल्पना के प्रकार, परिभाषा, उपयोगिता

     "दूरस्थ या परोक्ष वस्तुओं के संबंध में चिंतन करना ही कल्पना है" - मैकडूगल

    "मनोविज्ञान में कल्पना शब्द का प्रयोग सब प्रकार की प्रतिमाओं के निर्माण को व्यक्त करने के लिये किया जा सकता है" - डमविल

     

    कल्पना - कल्पना के प्रकार, परिभाषा, उपयोगिता
    कल्पना - कल्पना के प्रकार, परिभाषा, उपयोगिता 

     

    कल्पना की परिभाषा

    जब मनुष्य भूतकाल एवं भविष्यकाल के बारे में वर्तमान समय में जो कुछ सोचता है वही कल्पना है।

    कल्पना के प्रकार

    कल्पना का वर्गीकरण विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने अपने-अपने मतानुसार किया है। दो प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक मैकडूगल और ड्रेवर का वर्गीकरण निम्न प्रकार से है-

    कल्पना के प्रकार

    कल्पना के प्रकार

    कल्पना के प्रकार

    कल्पना के प्रकार


    पुनरुत्पादक कल्पना (Reproductive)

    इस कल्पना में स्मृति द्वारा गत अनुभवों की प्रतिमाओं को ज्यों का त्यों चेतना में लाने का प्रयत्न किया जाता है। जैसे - बालक जब किसी सुनी हुई पुरानी कहानी को यथासंभव कल्पना के सहारे उसी रुप में अभिव्यक्त करने का प्रयत्न करता है तो उसे पुनरुत्पादक कल्पना कहते है।

    उत्पादक कल्पना (Productive)

    इस प्रकार की कल्पना में गत अनुभवों और प्रतिमाओं को एक नवीन क्रम में या नवीनता के साथ प्रस्तुत किया जाता है इस कल्पना के दो उपयोग है।

    1. रचनात्मक कल्पना
    2. सृजनात्मक कल्पना

    आदानात्मक कल्पना (Receptive)

    इस प्रकार की कल्पना को अनुकरणात्मक कल्पना भी कहते हैं। इस कल्पना के द्वारा व्यक्ति किसी ऐसी वस्तु को समझने का प्रयत्न करता है जिसे उसने प्रत्यक्ष रुप से कभी नहीं देखा या जाना है। इससे व्यक्ति दूसरों के कहने या बताने से उस विषय की कल्पना करने लगता है शिक्षा में इसी प्रकार की कल्पना का उपयोग होता है।

    सृजनात्मक कल्पना

    यह उच्च स्तर की कल्पना है इसमें अतीत अनुभवों के आधार पर व्यक्ति मन में एक काल्पनिक परिस्थित बनाता है और पूर्व प्राप्त सामग्री की प्रतिमा को नवीन क्रम में व्यवस्थित करता है यह भविष्योन्मुख होती है इसके दो प्रकार हैं-

    1. कार्यसाधक या प्रयोगात्मक कल्पना
    2. रसात्मक कल्पना

    कार्यसाधक कल्पना

    आज रेल, तार, टेलीफोन, वायुयान, आकाशवाणी, दूरदर्शन यन्त्र आदि कार्यसाधक कल्पना का ही परिणाम है। इस प्रकार की कल्पना विचारक, अन्वषक या वैज्ञानिक की होती है।

    रसात्मक या सौन्दर्यात्मक कल्पना

    यह कल्पना सौन्दर्य-लिप्सा या भावनाओं को संतुष्ट करती है। यह कल्पना सौन्दर्य की सृष्टि और प्रशंसा में लीन रहती है।

    रसात्मक कल्पना के दो उपभाग हैं-

    1. मनतरंगी कल्पना
    2. कलात्मक कल्पना

    कलात्मक कल्पना

    इसके द्वारा कला संबंधी कार्यों का सृजन होता है। यह मानव के लिए लाभप्रद होती है।नाटक, कहानी उपन्यास और चित्र आदि में यही कल्पना पायी जाती है।

    मनतरंगी कल्पना

    इस प्रकार की कल्पना में किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं होता है। यह कल्पना न व्यक्ति के लिए उपयोगी होती है और न समाज के लिए। इसमें मन कल्पना के पंख लगाकर उड़ने लगता है। इस प्रकार की कल्पना को हवाई किले बनाना, ख्याली पुलाव पकाना आदि नाम दिये जाते हैं।

    कल्पना और शिक्षा

    बालक की शिक्षा में कल्पना का महत्वपूर्ण स्थान है। कल्पना के विकास के लिए निम्नांकित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है।

    1. ज्ञानेन्द्रियों को प्रशिक्षित करना।
    2. भाषा-विकास पर ध्यान देना।
    3. काल्पनिक खेल एवं क्रियाओं के लिए अवसेदन।
    4. कहानी सुनाना।
    5. रचनात्मक प्रवृत्ति का विकास करना।
    6. अभिनय करना।

    शिक्षा में कल्पना की उपयोगिता 

    1. ज्ञानार्जन में सहायक।
    2. नवीन आविष्कारों में उपयोगी।
    3. इच्छाओं की सन्तुष्टि का साधन।
    4. समायोजन में सहायक।
    5. सौन्दर्य बोध का विकास।
    6. भावी जीवन की तैयारी में सहायक।
    7. स्वास्थ्य की दृष्टि से उपयोगिता।

    • इंजीनियर किसी पुल निर्माण करने की कल्पना पहले से करके एक रूपरेखा तैयार करता है उसकी कल्पना किस प्रकार की है - रचनात्मक कल्पना
    • वैज्ञानिक न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण शक्ति का सिद्धान्त जिस कल्पना पर आधारित है वह है - सैद्धान्तिक
    • कवि कविता की रचना किस कल्पना के आधार पर करता है - सृजनात्मक कल्पना
    • शिक्षक किस कल्पना के आधार पर शिक्षा प्रदाना करता है - पुनरुत्पदनात्मक कल्पना
    • दिवास्वप्न में कल्पना करना कि मुझे एक लाख रुपये की लाटरी लग गयी है। किस प्रकार की कल्पना है - मनतरंगी
    • सृजनात्मक कल्पना के दो प्रकार  है - कार्यसाधक कल्पना, रसात्मक कल्पना


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    Sunday, December 13, 2020

    स्मृति, विस्मृति

     स्मृति

    स्मृति, विस्मृति
    स्मृति, विस्मृति



    "पूर्व समय में सीखी हुई बातों को याद रखना ही स्मृति है।" कथन है - वुडवर्थ

    "स्मृति से तात्पर्य अतीत की घटनाओं की कल्पना करना और इस तथ्य को पहचान लेना कि ये अतीत के अनुभव है" - मैकडूगल

    • संवदी स्मृति (sensory memory) होती है - 4 सेकेण्ड  तक
    • अल्पकालीन स्मृति(short term memory)  कितनी अवधि की होती है - 20 सेकेण्ड तक
    • स्मृति की सर्वश्रेष्ठ प्रणाली कौन सी है - पहचानना

    स्मृति के प्रकार

    1. व्यक्तिगत स्मृति
    2. अव्यक्तिगत स्मृति
    3. तात्कालिक स्मृति
    4. स्थायी स्मृति
    5. सक्रिय स्मृति
    6. निष्क्रिय स्मृति
    7. रटंत स्मृति
    8. तार्किक स्मृति
    9. सच्ची अथवा शुद्ध स्मृति
    10. आदत स्मृति
    11. मनोवैज्ञानिक स्मृति
    12.  शारीरिक स्मृति
    13. इन्द्रिय अनुभव स्मृति

    स्मृति के आधार अथवा अंग

    स्मृति के चार अंग हैं-

    1. सीखना
    2. धारण करना
    3. पुनः स्मरण करना
    4. पहचान करना

    • स्मृति का अंग नहीं है - चिन्तन
    • अच्छी स्मृति की विशेषता है - शीघ्र अधिगम, शीघ्र स्मरण, शीघ्र पहचान, अनावश्यक बातों की विस्मृति
    • वास्तविक स्मृति में याद किया जाता है - क्रमबद्ध रुप से
    • पुनः स्मृति में बाधा उत्पन्न करती है - भय , चिन्ता , परेशानी
    • सीखी हुई कोई भी क्रिया मस्तिष्क में जब अंकित हो जाती है तो उसे कहते है - स्मृति चिन्ह
    • अच्छी स्मृति की सबसे प्रमुख विशेषता है - शीघ्र याद होना
    • संघनन सिद्धान्त संबंधित है - स्मृति


    विस्मृति

    भूतकाल के किसी अनुभव को वर्तमान चेतना में लाने की असफलता को विस्मृति कहते हैं।

    • विस्मृति दो प्रकार की होती है - सक्रिय विस्मृति, निष्क्रिय विस्मृति
    • जब व्यक्ति किसी बात को भूलने का प्रयत्न करके उसे भुला देता है तो उसे कहते है - सक्रिय विस्मृति
    • सीखी हुई वस्तु को धारण और पुनः स्मरण करने में असफल होना ही - विस्मृति कहलाती है
    • विस्मृति के कारण है- मानसिक द्वन्द्व, अनाभ्यास का सिद्धान्त, मानसिक आघात, दमन सिद्धान्त
    • जब व्यक्ति प्रयास न करने पर भी किसी बात को स्वयं भूल जाता है तो  उसे - निष्क्रिय विस्मृति कहते हैं

    विस्मृति के कारण

    1. बाधा
    2. दमन
    3. अनाभ्यास
    4. समय का प्रभाव
    5. रुचि
    6. ध्यान या इच्छा का अभाव
    7. विषय का स्वरुप
    8. विषय की मात्रा
    9. सीखने में कमी
    10. सीखने की दोषपूर्णविधि
    11. मानसिक आघात
    12. मानसिक द्वन्द्व
    13. मानसिक रोग
    14. मादक वस्तुओं का प्रयोग 
    15. स्मरण न करने की इच्छा


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    वैयक्तिक भिन्नता

     वैयक्तिक भिन्नता

    प्रकृति का नियम है कि सम्पूर्ण संसार में कोई भी दो व्यक्ति पूर्णतया एक जैसे नहीं हो सकते। उनमें कुछ न कुछ भिन्नता अवश्य होगी।

     

    वैयक्तिक भिन्नता

    वैयक्तिक भिन्नता

     

    • "व्यक्तिगत विभिन्नताओं से हमारा तात्पर्य व्यक्तित्व के उन सभी पहलुओं से है, जिसका माप किया जा सकता है, कथन है" -स्किनर
    • "शरीर के आकार और स्वरुप, शारीरिक कार्योें संबंधी क्षमताओं, बुद्धि, उपलब्धि, ज्ञान, रुचियों, अभिवृत्तियों और व्यक्तित्व के लक्षणों में माप की जा सकने वाली विभिन्नताओं की उपस्थिति सिद्ध हो चुकी है।" - टाॅयलर
    • "कोई व्यक्ति अपने समूह के सदस्यों के शारीरिक तथा मानसिक गुणों के औसत से जितनी भिन्नता रखता है, उसे वैयक्तिक भिन्नता कहते हैं , कथन है "- जेम्स ड्रेवर
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    Tuesday, December 1, 2020

    मन जिसका पावन होता है। सबका मन-भावन होता है। Maa... Hindi Kavita

      मां 

    मन जिसका पावन होता है।  सबका मन-भावन होता है। Maa... Hindi Kavita


    मन जिसका पावन होता है।

    सबका मन-भावन होता है।

    दे शिशु को ममता की छाया,

    यों मां का दामन होता है।

    मां का मन तो स्वयं यशोदा,

    जीवन वृन्दावन होता है।

    दे मां को जो दुःख हरदम वह राम नहीं रावण होता है।

     जो देता है मां को सुख उसके हिस्से में सावन होता है।

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    देखे थे मैंने भी कभी, अहले वतन पे मरने के ख्वाब। Waqt ki mahatta... Hindi_Kavita

     वक्त की महत्ता

    वक्त की महत्ता


    देखे थे मैंने भी कभीअहले वतन पे मरने के ख्वाब।

    लेकिन अचम्भा रह गयाउतरा जो सर से मेरे नकाब,

    मुझको खुद से थे गिलेकुछ कर  पाने की वजह।

    फिर भी मैं खामोश थासबसे बड़ी थी ये सजा।

    मुद्दत से एक मौका मिलाशिकवा मिटाने के लिए।

    खुद को मैं ढूढ़ने  निकलामन में एक दीपक के लिए।

    खुद मैं  खोज पायावक्त था एकदम करीब।

    जब मिला तब वक्त  थारो रहा कैसा नसीब।

    वक्त की दुनिया है यारोंबेवक्त कुछ होता नहीं।

     

     अभागेफिर मिलेंगेवक्त को आने दो.........

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    दबी हुई जो चिंगारी, वह फिर से भड़क उठेगी। आसान समझ न मौन रुप, ये बांहें फड़क उठेगी। Hindi_Kavita

     चिंगारीक्रिकेट

    चिंगारी- क्रिकेट


    दबी हुई जो चिंगारीवह फिर से भड़क उठेगी।

    आसान समझ  मौन रुपये बांहें फड़क उठेगी।

    परमाणु बम का खौफ जताकरक्या तुम हमें डराओगे।

    यह शारजाह की फील्ड नहींजो वल्र्डकप ले जाओगे।

    अंगारों की राह चलोगेरग-रग तड़प उठेगी।

    दबी हुई जो चिंगारीवह फिर से भड़क उठेगी।

     कश्मीर को चांद सितारेक्या तोड़ोगे तुम।

    मचल रहे तूफान के रुखक्या मोड़ोगे तुम।

    हो जाओगे खाकबिजलियां कड़क उठेंगी।

    दबी हुई जो चिंगारीवह फिर से भड़क उठेगी।

    मानवता कर रही विलापकरुणा है सिसक रही।

    शांति प्रेम के अनुयायीहर ममता भी है मचल रही।

    बारुदों के ढेर पर बैठीदुनिया तड़प् उठेगी।

     दबी हुई जो चिंगारीवह फिर से भड़क उठेगी।

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